जिले में लावारिस गोवंश की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। सड़कों के बीच में गोवंश के बैठने से न केवल जाम लग रहा है बल्कि इनसे हादसे भी बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ सालों में तो लावारिस पशुओं की संख्या काफी बढ़ चुकी हैं।
ऐसी-ऐसी नस्ल के गोवंश सड़कों पर हैं जिनके संरक्षण के लिए सरकार भी प्रयास कर रही है। सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि अच्छी नस्ल के होने के बावजूद गोवंश सड़क पर क्यों हैं। लावारिस गोवंश से हो रहे नुकसान व इसके समाधान को लेकर लोगों ने अपने-अपने सुझाव भेजे हैं।
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तेजली के सुंदू सांगवान का कहना है कि हम कहीं जा रहे होते हैं कि अचानक सड़क पर गोवंश आ जाता है। इससे वाहन के एकदम से ब्रेक भी नहीं लग पाते और हादसा हो जाता है। काफी लोग इन गोवंशों की वजह से अपनी जान भी गंवा चुके हैं। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। जितना गोवंश आज सड़कों पर धक्के खा रहा है उतना पहले कभी नहीं देखा। इन्हें पकड़ कर गोशाला में छोड़ा जा सकता है।
प्राेफसर कॉलोनी के राजन दुग्गल का कहना है कि किसानों पर कभी प्रकृति की मार पड़ती है तो कभी लावारिस गोवंश नुकसान पहुंचाते हैं। खेतों में फसल पकने को तैयार होती है तो गोवंश खेत में घुस कर उसे खा जाते हैं। किसान को अपनी फसल की रखवाली करने के लिए ही रह गया है। प्रशासन गोवंश को गोशाला तक पहुंचाने में पूरी तरह से विफल रहा है। इसे गंभीरता से लेना होगा।
जगाधरी के संजू पंडित का कहना है कि पहले तो केवल सड़कों पर ही गोवंश दिखते थे, लेकिन अब तो कॉलोनियों व गांवों की गलियों में भी गोवंश पहुंच गए हैं। कई बार तो गली बहुत तंग होती है और गोवंश उसके बीचोंबीच बैठ जाते हैं। जिससे रास्ता अवरूद्ध हो जाता है। यदि कोई उन्हें भगाने आता है तो गोवंश पीछे दौड़ कर मारने को आते हैं। लोगों का गोवंश के डर से घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
गांव टापू माजरी के नितिन गुर्जर का कहना है कि पिछले कुछ सालों में गोवंश की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। वैसे तो कई गोशालाएं हैं जिनमें लावारिस गोवंश को रखा गया है। परंतु सरकार की तरफ से गोशालाओं को बहुत कम बजट दिया जाता है। जिससे गोवंशों का गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए गोशाला संचालक लावारिस गोवंश को रखने से मना कर देते हैं। यदि सरकार आर्थिक मदद में वृद्धि करे तो निश्चित ही वह इन्हें रखने को तैयार हो जाएंगे।