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Yamuna Nagar News: सरकारी कोच है नहीं...निजी कोचिंग में हो रही जेब ढीली

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यमुनानगर। जिले में सरकारी स्तर पर जहां ज्यादातर खेलों के कोच नहीं हैं, वहीं शहर से लेकर देहात क्षेत्र में भी एक के बाद एक निजी खेल अकादमियां फलफूल रही हैं। हालांकि सरकारी स्तर पर कोच मिले तो खिलाड़ियों को मुफ्त कोचिंग मिल सकती है, पर वर्षों से खेल कोचों के अभाव में खिलाड़ी सुविधा से वंचित हैं।
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इसका सीधा फायदा निजी खेल अकादमियों को मिल रहा है, जिनकी संख्या के साथ वहां खिलाड़ी भी बढ़ रहे हैं। यहां खिलाड़ियों व उनके अभिभावकों को जेब ढीली करनी पड़ रही है, पर आर्थिक कमजोर खिलाड़ी चाहकर भी निजी कोचिंग नहीं ले पा रहे। ऐसे में किशोर व युवा वर्ग में काफी संख्या ऐसी हैं, जो खेल से वंचित हैं। बता दें कि जिले में सरकारी स्तर पर महज 11 खेलों के 12 कोच हैं, जिससे सरकारी स्तर पर मुफ्त कोचिंग ले रहे खिलाड़ियों की संख्या कम हैं, उधर जिले में अनुमान मुताबिक करीब 60 निजी अकादमियां हैं, जिनमें करीब 3000 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं।
सरकारी स्तर पर सिर्फ 11 खेलों के 12 कोच- जिले में सरकारी स्तर पर तेजली खेल परिसर में फुटबॉल, हॉकी, बॉक्सिंग, खो-खो, कबड्डी, बैडमिंटन, तलवारबाजी, भारोत्तोलन, जूडो, लॉन टेनिस के एक-एक कोच हैं, वहीं कुश्ती के दो कोच हैं। तेजली खेल परिसर में ही खेलो इंडिया का लघु शूटिंग केंद्र भी है, जहां शूटिंग स्पर्धा की कोचिंग मिल रही है।
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सरकारी कोचों की कमी में कुछ खेलों के खिलाड़ियों को विभाग की ओर से संस्थानों में हर साल चलाई जाने वाली खेल नर्सरियां का सहारा है। अन्यथा निजी अकादमियों का ही रुख करना पड़ता है। सरकारी कोचों सहित संस्थानों में खेल नर्सरियां हर साल शुरू होने वाली खेल नर्सरियों में खिलाड़ियों को निशुल्क प्रशिक्षण की सुविधा है। खेल नर्सरियों में संस्थानों द्वारा रखे कोचों को वेतन और खिलाड़ियों को दो अलग-अलग आयु वर्ग में 1500 व 2000 रुपये छात्रवृत्ति दी जाती है। गत वर्ष 35 खेल नर्सरियां रही, जो परीक्षाओं के चलते बंद हुई। अब नए सिरे से खेल नर्सरियां शुरू की जानी है।
सरकारी कोच हो तो न देनी पड़े फीस
क्रिकेट खिलाड़ी शुभम, अभिषेक, रवीन ने बताया कि सरकारी स्तर पर कोच मिले तो निजी अकादमियों को खिलाड़ियों को फीस न देनी पड़े। साथ ही सरकारी स्तर पर मुफ्त कोचिंग के साथ उन्हें डाइट खर्च भी मिल सकता है। इसलिए प्रदेश सरकार व खेल विभाग को जिले में ऐसे खेलों के कोच रखने चाहिए, जिनमें किशोर व युवा वर्ग का रुझान अधिक है। अभिभावकों में भूपेश, अरविंद ने कहा कि तेजली खेल परिसर में पता करने पर पाया कि कोच नहीं है, तब बच्चों को निजी अकादमी भेजने पर मजबूर हैं।
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