अवैध कॉलोनियों में रहने का दंश झेल रहे हजारों लोग अब अपने को वैध कॉलोनी
के रहनुमाइदा कह पाएंगे। अभी तक बिना रजिस्ट्री और सुविधाओं से वंचित इन
कॉलोनियों में भी विकास के द्वार खुलेंगे।
क्योंकि सरकार की ओर से एक जनवरी
2014 तक 50 प्रतिशत बस चुकी कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा की है।
इससे शहर की अवैध कॉलोनियों में रह रहे लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं है।
अगर शहर की अवैध कॉलोनियां वैध हो जाती है तो इससे जनता को तो बड़ी राहत
मिलेगी ही साथ ही सरकारी खजाना भी मालामाल होगा। क्योंकि रजिस्ट्री होने से
पैसा सरकारी खाते में भी आएगा।
अगर प्लॉट की रजिस्ट्री महिला के नाम होती
है तो तीन से पांच प्रतिशत और अगर रजिस्ट्री पुरुष के नाम कराई जा रही है
तो चार से छह प्रतिशत पैसा सरकार के खाते में जाता है। हालांकि अभी नगर
निगम के पास भी इस तरह का कोई रिकार्ड नहीं है कि निगम क्षेत्र में कितनी
अवैध कॉलोनियां हैं।
सरकार की घोषणा के बाद अब निगम यह सर्वे कराने की
तैयारी में है कि निगम क्षेत्र में कितनी कॉलोनी अवैध के दायरे में आती है।
सरकार की ओर से पिछले माह भी यमुनानगर और जगाधरी की 17 कॉलोनियों का वैध
किया था। ये कॉलोनियां भी लंबे समय से अवैध थी।
प्रॉपर्टी में आएगी तेजी
अवैध
कॉलोनियां वैध होने के बाद यहां पर प्रॉपर्टी खरीद फरोख्त का कारोबार भी
खूब चलेगा। इससे प्रॉपर्टी में तेजी आना लाजिमी है। इसके साथ ही अब उन
लोगों का घर बनाने का सपना भी पूरा होगा जो रजिस्ट्री न होने के डर से
प्लाट नहीं खरीद पा रहे थे। इससे कई प्रॉपर्टी डीलरों को फिर से कारोबार
मिलेगा।
होम लोन का रास्ता होगा साफ
अभी तक इन कॉलोनियाें में
जैसे कैसे कर लोग प्लॉट तो ले रहे थे। लेकिन मकान बनाने के लिए उन्हें बैंक
से होम लोन नहीं मिल पा रहा था। इसका कारण रजिस्ट्री न होना, एनओसी न मिल
पाना और नक्शे पास न होना था। लेकिन अब होम लोन का रास्ता भी साफ होगा।
इससे लोगों का मकान बनाने का सपना तो साकार होगा ही साथ ही बैंकों को भी
लाभ पहुंचेगा।
अच्छा कदम है सरकार का
राजधानी कॉलोनी प्रमोद
कुमार, सुंदर विहार जगदीश चंद और न्यू सुंदर विहार निवासी कुलवंत सिंह का
कहना है कि उनकी कॉलोनी को बसे 10 से 12 साल हो गए हैं। लेकिन अभी तक
कॉलोनी को वैध नहीं किया गया है। पहले परिषद के समय में यहां पर मकान बनाने
के लिए नक्शे भी पास हो जाते थे। लेकिन जब से निगम बना है तब से तो नक्शे
भी पास नहीं हो रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले दिनों भी सरकार की ओर से
कुछ कॉलोनियों को वैध किया गया। लेकिन उनकी कॉलोनी का नाम नहीं आया है।
उनका कहना है कि कॉलोनियों को वैध करने का सरकार का फैसला लोगों को राहत
देने वाला है।