यमुनानगर। विश्व जल दिवस का उद्देश्य स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है, साथ ही जल संरक्षण के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित करना है। किंतु सरकारों के भरसक प्रयास के बाद भी जल संरक्षण में कोई सुधार नजर नहीं आया है। ऐसे में जलस्तर धरती के भूगर्भ में समा रहा है। यमुनानगर जिले के 251 गांवों में भूजल लेवल लगातार गिर रहा है। हर साल दो से तीन फीट लेवल नीचे खिसक रहा है जोकि भविष्य के लिए ये खतरे की घंटी है। सबसे ज्यादा जगाधरी, सरस्वतीनगर, साढौरा ब्लॉकों के गांवों में खराब स्थिति है। अटल भूजल योजना के विशेषज्ञों के अनुसार जहां वर्ष 2002 में 40 फीट, 2022 में 87 फीट पर पानी का लेवल था, वहीं वर्ष 2047 में 146 और 2100 में 271 फीट चौवा की स्थिति बन सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक गिर रहे भूजल जल का मुख्य कारण धान (जीरी) व गन्ना की फसल की सिंचाई के लिए पानी की खपत अधिक होना है तथा औद्योगिक और घरेलू गतिविधियों के लिए भूजल का अत्यधिक उपयोग भूजल स्तर में गिरावट का मुख्य कारण है। अटल भूजल योजना की रिपोर्ट के अनुसार धान में 1100 मिली मीटर तथा गन्ने की फसल में 2100 मिली मीटर सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता होती है जोकि काफी अधिक है। ऐसे में यदि किसान धान में डीसीआर विधि का उपयोग करें तो सिंचाई के दौरान पानी की खपत कम होगी।
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जल स्तर सुधार के लिए ये किए जा चुके प्रयास
विदित हो कि भूजल संकट को लेकर सरकार की तरफ से अटल भूजल योजना चलाई गई है, जिसके तहत लोगों को जलसंरक्षण के लिए जागरूक किया जा रहा है। लेकिन जिले के 251 गांवों में गिर रहे भूजल लेवल को सुधार के लिए अटल भूजल योजना के तहत किसानों को बाजरे का बायो 448 बीज बांटा गया, जगाधरी, सरस्वतीनगर, साढौरा व रादौर खंडों की पंचायतों में 93 पीजोमीटर लगाए गए, 500 यूथ एंबेसडर इसके अलावा भूजल सहेलियां तथा गांवों में भूजल सुधार के प्रति जागरूक करने के लिए फ्लैक्स बोर्ड इत्यादि कार्य किए जा चुके हैं। वहीं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की जिला सलाहकार रजनी गोयल भी 13 सालों से भूजल स्तर बनाए रखने के लिए कार्य कर रही हैं। इसके लिए उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
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वर्जन
हमने भूजल लेवल को सुधारने के लिए भरसक प्रयास किए हैं और इस दिशा में आगे भी कार्य चल रहा है। चार खंडों की 251 पंचायतें हैं जिनमें भूजल लेवल काफी नीचे है। भूजल स्तर को सामान्य रखने के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
-भूपेंद्र सिंह, आईईसी विशेषज्ञ अटल भूजल योजना, सिंचाई विभाग।