संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी ने गेहूं की फसल उगा रहे किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जनवरी के मध्य में ही अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो इस समय गेहूं की फसल के लिए अनुकूल नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों के अनुसार इस अवधि में गेहूं के लिए अधिकतम तापमान 16 से 17 डिग्री और न्यूनतम तापमान चार से पांच डिग्री सेल्सियस रहना चाहिए।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो गेहूं की बाल समय से पहले निकल सकती है। इससे दाने का भराव ठीक से नहीं हो पाएगा, जिससे दाना कमजोर रह जाएगा और पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसका सीधा नुकसान किसानों को झेलना पड़ सकता है। जिले में इस बार गेहूं का रकबा 90 हजार हेक्टेयर से अधिक है, ऐसे में मौसम में थोड़ा सा भी बदलाव हजारों किसानों की फसल को प्रभावित कर सकता है।
तापमान बढ़ने के साथ-साथ गेहूं की फसल में पीला रतुआ रोग का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र दामला ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। किसानों से अपील की गई है कि वे अपने खेतों में गेहूं की फसल की नियमित निगरानी करें। यदि कहीं भी पत्तियों पर पीले रंग की धारियां या धब्बे दिखाई दें तो तुरंत कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र को इसकी सूचना दें।
कृषि विज्ञान केंद्र दामला के जिला समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने बताया कि यदि बारिश के बाद भी तापमान अधिक बना रहता है तो किसान पोटॉशियम नाइट्रेट (13:0:45) का छिड़काव कर सकते हैं। इसके लिए दो किलोग्राम पोटॉशियम नाइट्रेट को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ गेहूं की फसल पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इससे समय से पहले फुटाव और बाल निकलने की समस्या से राहत मिलेगी। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से मौसम की जानकारी पर नजर रखने और समय-समय पर जारी की जा रही एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है, ताकि फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।