संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। हिंदू स्कूल में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से पांच दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। कथा के पहले दिन आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी त्रिपदा भारती ने प्रभु की कथा के महत्व से प्रभु भक्तों को अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि वह भक्त सौभाग्यशाली होते हैं, जिन्हें प्रभु की कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। कथा हमें जीवन जीने की कला सिखाती है।
उन्होंने कहा कि जीवन का उचित मार्गदर्शन हम कथा से प्राप्त कर सकते है। भारत में वैदिक काल से इस परंपरा का निर्वाह किया जा रहा है। अतीत में घटी घटनाओं को यथावत रूप में सुन लेना मात्र कथा नहीं है। वास्तव में प्रभु की कथा हमारे लिए स्वयं का विश्लेषण है। स्वयं से परिचय पाने का मार्ग है। यह आज के समाज का सत्य है, कि हम पूरी दुनिया की खबर तो रखते हैं, लेकिन खुद से बेखबर है।
अंतरिक्ष में ऊंची उड़ाने भर चुके है, सागर को माप चुके है, पर्वतों पर अपनी जीत के परचम लहरा चुके है। किंतु इन सबके बावजूद स्वयं से बहुत दूर व अपरिचित हो गए हैं। हम अपने लक्ष्य को विस्मृत कर बैठे है। इसलिए प्रभु की कथा हमें जागृत कर हमारे लक्ष्य की ओर अग्रसर करने का कार्य करती है। वास्तव में हमारे मानव तन का लक्ष्य उस ईश्वर को पाना है। जो एक पूर्ण गुरु से आत्मज्ञान प्राप्त करके ही संभव हो सकता है।
उन्होने ध्यान पद्धति बारे बताया कि हुए कहा कि ध्यान से हम स्वयं से जुड़ जाते है। हम अपने घट में ही ईश्वर का दर्शन करने में सक्षम हो जाते है। कथा में भजनों का गायन भी किया गया। इससे पूर्व कथा का शुभारंभ शिव मंदिर झंडा कमेटी के प्रधान रमेश चंद बिट्टू ने किया। समापन प्रभु कीआरती से किया गया। इस मौके पर एसएचओ अनिल कुमार, मुकेश अग्रवाल, प्रदीप सखूजा, राम गोपाल सेतिया, सतपाल शर्मा, कैलाश वर्मा छछरौली, संजय आनंद, सुरेश सैनी, ओम प्रकाश प्रजापति व गुलशन ठुकराल उपस्थित रहे।