छछरौली। छछरौली स्थित हरियाणा के पहले चौ. सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र बनसंतौर में रह रही चार हथिनियों को जंगली हाथियों से खतरा है। ऐसे में इन हथिनियों को सुरक्षित रखने के लिए बनसंतौर के चारों तरफ जल्द ही मजबूत दीवार बनेगी। 84 एकड़ में फैली इस पूरी जगह को सुरक्षा कवच का घेरा देने के लिए वन्य प्राणी विभाग की तरफ से चहारदीवारी के लिए दो करोड़ का प्रस्ताव बनाकर हेड क्वार्टर भेजा गया है।
मौजूदा समय में पुनर्वास केंद्र में चंचल, लिली, लक्ष्मी-वन व लक्ष्मी-टू चार हथिनियां हैं। जिन्हें अलग-अलग जगहों से रेस्क्यू कर उनकी देखभाल के लिए यहां रखा गया है। इनमें सबसे उम्रदराज हथिनी चंचल 81 साल की है। हालांकि चारों हथिनियों पर किसी जंगली हाथी ने हमला नहीं किया है, लेकिन नजदीक कलेसर जंगल होने के कारण कई बार जंगली हाथियों का झुंड विचरण करते हुए बनसंतौर तक पहुंच जाता है। ये ऐसा कई बार हो चुका है।
इससे चारों हथिनियां में भय का माहौल हो जाता है। केंद्र चारों तरफ से खुला है। सड़क की तरफ लगी लोहे की जाली व कांटेदार तार नाकाफी है। दूसरा यहां पर महावतों के क्वार्टर, स्टाॅफ व विभाग का दफ्तर भी बना है। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि को देखते हुए 84 एकड़ में पत्थरों के साथ मजबूत दीवार बनाने का निर्णय लिया गया है। इसका प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा जा चुका है।
सन 2008 में लगभग एक करोड़ की लागत से 50 एकड़ जमीन पर चौ. सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र (एलिफेंट सेंटर) की स्थापना की गई। सन 2008 घरौंडा से बिना परमिट मिले दो मादा हथिनियों लक्ष्मी व चंचल को काबू कर बनसंतौर छोड़ा गया था। एक हथिनी लिली को सिरसा चुनाव के दौरान बीएसपी के एक प्रत्याशी के जुलूस से काबू कर बनसंतौर केंद्र पर छोड़ा गया था।
इसी तरह हथिनी लक्ष्मी टू को दिल्ली सरकार के माध्यम से बनसंतौर में भेजा गया था। ऐसे में अब इस केंद्र में चार हथिनियां हैं। जोकि हथिनी मोती की पिछले साले हथिनी मोती की मौत हर्पीस वायरस से उसकी किडनियां फेल होने से हुई थी। इसका खुलासा बरेली के भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) की रिपोर्ट से हुआ था। संवाद
पुनर्वास केंद्र में स्टाफ, महावतों के क्वार्टरों के अलावा चार हथिनियां हैं, जिनकी सुरक्षा की दृष्टि चहारदीवारी का होना अति आवश्यक है। इसके लिए विभाग को दो करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया। मंजूरी मिलते ही टेंडर प्रक्रिया के बाद कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा। - लीलूराम, इंस्पेक्टर, वन्य प्राणी विभाग यमुनानगर।