व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में श्रद्धालुओं को भक्ति के गूढ़ रहस्य के बारे में बताया गया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मीना भारती ने कहा कि गुरु भक्ति केवल बाहरी श्रद्धा तक सीमित नहीं होती है। यह तो ऐसा क्षेत्र है, जिसका पार कोई भी नहीं पा सकता है।
उन्होंने बताया कि गुरु भक्ति नमन और मनन से आत्मा के भीतर जागृत होने वाली एक दिव्य प्रक्रिया है। नमन का अर्थ है विनम्रता से गुरु चरणों में श्रद्धापूर्वक झुकना, जबकि मनन का अर्थ है गुरु के ज्ञान, उपदेश और जीवन मूल्यों को चिंतन व आचरण में उतारना है। जब नमन और मनन दोनों एक साथ जुड़ते हैं, तभी सच्ची गुरु भक्ति का जन्म होता है। भारतीय संस्कृति में गुरु को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने वाला दिव्य प्रकाश माना गया है। उन्होंने बताया कि केवल शब्दों से गुरु की महान सत्ता का सम्मान करना पर्याप्त नहीं अपितु उनके आदर्शों का अनुसरण करते हुए अपने जीवन में उन दिव्य सूत्रों को उतारना जरूरी है।