संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। आज विश्व रेडियोग्राफी दिवस मनाया जा रहा है। वहीं जिले के स्वास्थ्य विभाग में अल्ट्रासाउंड करने के लिए रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली पड़ा है। इससे जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों को जिले में अल्ट्रासाउंड की सुविधा ही नहीं मिल रही। अस्पताल में केवल गर्भवतियों को अल्ट्रासाउंड का फायदा जरूर मिल रहा है।
इनका अल्ट्रासाउंड करने के लिए भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। अल्ट्रासाउंड करने के लिए सोनोलॉजिस्ट है। इसके लिए अस्पताल की एसएमओ डॉक्टर संजना दुआ ने छह माह का कोर्स किया हुआ है। जब स्वास्थ्य विभाग के पास अपना रेडियोलॉजिस्ट न हो तो विभाग द्वारा अपने ही किसी डॉक्टर को अल्ट्रासाउंड करने के लिए छह माह की ट्रेनिंग दी जाती है।
इस कोर्स को करने के बाद डॉक्टर गर्भवतियों का अल्ट्रासाउंड करने में निपुण हो जाता है। जिले में यह कोर्स डॉ. संजना दुआ ने कर रखा है। सुबह से ही उनके पास अल्ट्रासाउंड कराने वाली गर्भवतियों का जमावड़ा लग जाता है। जिला अस्पताल में चल रहे अल्ट्रासाउंड केंद्र में अगस्त माह में 564, सितंबर में 483, अक्तूबर में 389 गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड हुए थे।
नवंबर के एक सप्ताह में अब तक 45 अल्ट्रासाउंड हो चुके हैं। यह डाटा तो केवल उन गर्भवतियों का है जिनके अल्ट्रासाउंड जिला अस्पताल में हुए हैं। जिलेभर की अन्य गर्भवतियों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी सेंटर में भेजा जाता है, जहां पर उनका मुफ्त में अल्ट्रासाउंड होता है। इसकी एवज में स्वास्थ्य विभाग निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक को भुगतान करता है।
भटक रहे अन्य रोगों के मरीज
पेट में पत्थरी या रसोली, सूजन, पेट के किसी अंग का ठीक से काम न करना समेत अन्य रोगों का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है।इनमें से किसी भी रोग से ग्रस्त मरीज को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं दी जा रही है। ऐसे लोगों को अपना अल्ट्रासाउंड निजी सेंटरों पर ही करना पड़ता है। वहां उन्हें न्यूनतम 1000 रुपये से लेकर कई हजार रुपये का भुगतान करना पड़ता है।
रेडियोलॉजिस्ट के लिए मुख्यालय को लिखा : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डाॅ. मंजीत सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में रेडियोलॉजिस्ट का पद काफी समय से खाली है। फिलहाल गर्भवतियों का ही अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है। रेडियोलॉजिस्ट पद को भरने के लिए मुख्यालय लिखा हुआ है।