संवाद न्यूज एजेंसी
सरस्वती नगर। लगातार हो रही तेज बारिश के बीच सड़क किनारे भीगा हुआ, थका और पूरी तरह असहाय अवस्था में बैठे एक व्यक्ति को देखकर शायद कोई भी आगे बढ़ जाता, लेकिन इसी दृश्य ने मानवता की एक ऐसी कहानी को जन्म दिया, जिसने 20 वर्षों से बिछड़े परिवार को फिर से जोड़ दिया। यह कहानी है गुरप्रताप मिश्रा की, जिन्हें समाजसेवी संस्था नी आसरे दा आसरा की टीम ने समय रहते सहारा देकर नई जिंदगी दी।
सरस्वती नगर क्षेत्र में बारिश के दौरान एक व्यक्ति के लावारिस हालत में बैठे होने की सूचना संस्था की टीम को मिली। सूचना मिलते ही संस्था के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और व्यक्ति को सुरक्षित आश्रम लाया गया। आश्रम में प्राथमिक देखभाल के बाद बातचीत के दौरान उस व्यक्ति ने अपना नाम गुरप्रताप मिश्रा बताया। उसने बताया कि उसकी सबसे बड़ी इच्छा सरकारी नौकरी प्राप्त करने की थी। इसी सपने को पूरा करने के लिए वह वर्षों पहले अपने घर से निकल पड़ा, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं।
संघर्ष करते-करते वह भटकाव का शिकार हो गया और धीरे-धीरे सड़कों पर जीवन गुजरने लगा। देखते ही देखते 20 वर्ष बीत गए और इस दौरान उसका अपने परिवार से हर प्रकार का संपर्क टूट गया। रेस्क्यू के बाद संस्था द्वारा उसे भोजन, वस्त्र और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई। साथ ही उसका पुनर्वास शुरू किया गया। कुछ समय बाद गुरप्रताप मिश्रा ने स्वयं अपने घर का पता बताया। जब संस्था ने उसके परिजनों से संपर्क किया तो परिवार को इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ, क्योंकि वे उसे दो दशकों से लापता मान चुके थे।
सूचना मिलते ही गुरप्रताप मिश्रा के परिजन चंपारण, बिहार से आश्रम पहुंचे। वर्षों बाद बेटे को जीवित और सामने देखकर परिवार भावुक हो उठा। आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और आश्रम में मिलन के दृश्य ने सभी को भावुक कर दिया। परिजनों ने संस्था के पदाधिकारी जोगिंदर सिंह और गुरकीरत सहित पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।
यह कहानी इस बात की मिसाल है कि समय पर मिली मदद, संवेदना और मानवीय प्रयास किसी भटके हुए व्यक्ति को न केवल उसका जीवन बल्कि उसका परिवार भी लौटा सकते हैं।
बारिश के बीच में इस तरह से असहाय अवस्था में बैठा मिला था गुरप्रताप। संस्था