यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को झटका देते हुए 2.50 लाख रुपये मेडिकल क्लेम राशि अदा करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने माना कि कंपनी ने पॉलिसी की शर्तों के विपरीत जाकर शिकायतकर्ता का दावा गलत तरीके से खारिज किया। जगाधरी विष्णु गार्डन निवासी गौरव अरोड़ा ने वर्ष 2018 में मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी, जिसे समय-समय पर नवीनीकृत कराया गया। 6 जुलाई 2021 से 5 जुलाई 2022 तक प्रभावी पॉलिसी में बीमा राशि 5 लाख रुपये थी।
उनके चार वर्षीय पुत्र सर्वज्ञ अरोड़ा को ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के उपचार के लिए 7 नवंबर से 19 नवंबर 2021 तक नवी मुंबई स्थित न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया, जहां बोन मैरो से संबंधित एमएनसी (मोनोन्यूक्लियर सेल) ट्रांसप्लांट प्रक्रिया की गई। इलाज पर 3,61,400 रुपये खर्च हुए।
इलाज के बाद सभी बिल और दस्तावेज बीमा कंपनी को सौंपे गए, लेकिन 17 मार्च 2022 को कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि बच्चे को अप्रमाणित और प्रयोगात्मक थेरेपी दी गई है, जो पॉलिसी के दायरे में नहीं आती। कंपनी ने पॉलिसी की एक्सक्लूजन क्लॉज का हवाला दिया। आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पॉलिसी के मॉडर्न ट्रीटमेंट कवरेज प्रावधान का अवलोकन किया। इसमें स्पष्ट रूप से हेमाटोपोएटिक स्टेम सेल थेरेपी को बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए कवर किया गया था। आयोग ने पाया कि संबंधित उपचार बोन मैरो से जुड़ा था और पॉलिसी की शर्तों के अनुसार इसके लिए अधिकतम 2.50 लाख रुपये तक भुगतान देय था। संवाद