यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक अहम फैसले में कोचिंग संस्थान को छात्र की जमा फीस लौटाने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने माना कि संस्थान की ओर से अपनाई गई शर्तें एकतरफा थीं और सेवा में कमी के साथ अनुचित व्यवहार किया गया।
आयोग ने संस्थान को 65,858 रुपये की पूरी फीस सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने और 11,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग के फैसले के अनुसार कृष्णा कॉलोनी निवासी विपिन शर्मा ने अपने नाबालिग बेटे आयुष शर्मा के लिए जेईई एडवांस की तैयारी के लिए आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड में दाखिला करवाया था। इसके लिए 65,858 रुपये की राशि नेट बैंकिंग के माध्यम से जमा करवाई गई थी। छात्र को कोचिंग सेंटर, करनाल में रोल नंबर भी आवंटित किया गया, लेकिन आयुष ने केवल एक दिन यानी 25 मार्च 2025 को ही कक्षा में भाग लिया।
शिकायत में बताया गया कि एक दिन की कक्षा के बाद छात्र मानसिक दबाव और अन्य परिस्थितियों के चलते आगे पढ़ाई जारी नहीं रख सका। इसके बाद अभिभावक ने 28 मार्च 2025 को संस्थान से दाखिला रद्द कर पूरी फीस वापसी की मांग की, लेकिन संस्थान ने नियमों का हवाला देते हुए केवल आंशिक राशि लौटाने की बात कही। संस्थान के अनुसार, कुल फीस में से रजिस्ट्रेशन और एडमिशन फीस गैर-वापसी योग्य थी और केवल सीमित राशि ही लौटाई जा सकती थी। आयोग के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें और दस्तावेज पेश किए गए। सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि छात्र ने केवल एक दिन ही कक्षा में भाग लिया और संस्थान की ओर से यह साबित नहीं किया जा सका कि छात्र ने नियमित रूप से कक्षाएं लगाई थीं।
इसके अलावा, संस्थान की ओर से प्रस्तुत शर्तों और नियमों पर छात्र या अभिभावक के हस्ताक्षर नहीं थे, जिससे उनकी वैधता पर भी सवाल उठे।आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि संस्थान द्वारा लागू की गई शर्तें एकतरफा हैं और उपभोक्ता के हितों के खिलाफ हैं। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया कि जब छात्र ने मात्र एक दिन ही कक्षा में भाग लिया, तो पूरी फीस रोकना उचित नहीं है। संवाद