फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सबसे श्रेष्ठ है गुरु-शिष्य का संबंध : नीलम

Mon, 22 Jun 2026 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
विज्ञापन
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में सत्संग के दौरान उप​स्थित श्रद्धालु। संस्थान
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन


जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग करवाया गया। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी नीलम भारती ने गुरु अपनी कृपा और तपोबल से शिष्य के भक्ति पथ पर आने वाले हर अवरोध नष्ट करते देते हैं। गुरु शिष्य का संबंध इस संसार का सर्वश्रेष्ठ है।
उन्होंने कहा कि यदि शिष्य मन, वचन, कर्म गुरु के चरणों में समर्पित कर दे तो गुरु अपना जीवन शिष्य के कल्याण के लिए लगा देते हैं। यदि देखा जाए तो गुरु का त्याग शिष्य के त्याग से बहुत बड़ा है, चूंकि गुरु हर क्षण ही शिष्य के संरक्षण हेतु तत्पर रहता है। गुरु अपने शिष्य के संचित कर्मों को समाप्त करके उसके प्रारब्ध की उस धार को कुंठित कर देते हैं, जो भविष्य में उनके शिष्य को कष्ट देने वाली हो।
विज्ञापन

साध्वी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा को मानव जीवन की सबसे पवित्र और श्रेष्ठ परंपराओं में से एक माना गया है। गुरु केवल बाहरी रूप से मार्गदर्शन करने वाला व्यक्ति नहीं होता अपितु गुरु शिष्य के जीवन में ज्ञान, विवेक, संस्कार और आत्मविश्वास का संचार कर उसे अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर करता है। गुरु-शिष्य का संबंध श्रद्धा, विश्वास, अनुशासन और समर्पण पर आधारित होता है।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि गुरु अपने अनुभव और आदर्श जीवन के माध्यम से शिष्य को केवल विद्वान ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और नैतिक नागरिक बनने की प्रेरणा देता है। बदलते समय में भी गुरु-शिष्य परंपरा की प्रासंगिकता बनी हुई है। आधुनिक शिक्षा के साथ यदि गुरु के प्रति सम्मान, अनुशासन और जीवन मूल्यों का समावेश हो, तो समाज में संस्कारवान, संवेदनशील और उत्तरदायी पीढ़ी का निर्माण संभव है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें