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भक्त और भगवान के बीच भावों का संबंध : नीलम

Mon, 10 Nov 2025 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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प्रवचन करतीं साध्वी नीलम भारती व अन्य। आयोजक
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी नीलम भारती ने प्रवचन किया। उन्होंने कहा कि भक्त और भगवान के बीच भावों का संबंध होता है। संसार में किसी भी संचार से एक मनुष्य दूसरे से संपर्क करता है, किंतु भक्त व भगवान के बीच केवल भावों की पाती ही संपर्क का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि जब एक भक्त अपने भगवान को बिरहा व प्रेम अश्रु से भीगी हुई भावों की पाती को भेजता है, तो भगवान उसके पास आने के लिए आतुर हो जाते हैं। फिर भगवान ऐसे भक्त को दर्शन देने नहीं जाते अपितु ऐसे भक्त का दर्शन करने के लिए आते हैं। माता शबरी ऐसे ही भावों की पाती कई वर्षों तक प्रतिदिन अपने प्रभु के चरणों में भेजती रही और एक दिन इन्हीं भावों के वशीभूत होकर ही श्रीराम माता शबरी की कुटिया में आने के लिए बाध्य हो गए।
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उन्होंंने बताया कि ऐसा नहीं है कि भगवान के पास भक्त के भावों की पाती देर से पहुंचती है, किंतु भगवान अपने भक्त की परीक्षा लेते हैं कि कहीं उसके भीतर उठने वाले भाव क्षणिक तो नहीं है। भक्त भरत ने 14 वर्ष में इसी भावों की पाती को अपने प्रभु श्रीराम के चरणों से जुड़े रहने के लिए माध्यम बनाया। भगवान को भेजी भावों की पाती भक्त का वह समर्पण है जो बाहर से दिखाई नहीं देता किंतु वह अपना सर्वस्व अपने प्रभु के चरणों में सौंप चुका होता है।
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साध्वी ने कहा कि भक्त उन भावों को बोलकर नहीं अपितु बंद आंखों से अंतर आत्मा की गहराई में अनुभव करता है। यदि भक्त से पूछा जाए कि वह भावों की पाती को कैसे तैयार करता है तो उसका उत्तर होगा कि उसका विरह से भरा मन कागज बनता है, रोम-रोम का समर्पण कलम बन जाता है और उसकी आंखों से बहते आंसू स्याही बन कर उसकी अंतर आत्मा के भावों को लिखते हैं। सांस उस भावों की पाती को परमात्मा तक पहुंचाने का माध्यम बनती है। सत्संग में साध्वियों ने भजनों से भक्त व भगवान के संबंधों का गुणगान किया।

प्रवचन करतीं साध्वी नीलम भारती व अन्य। आयोजक

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