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सूर्य ग्रहण के चलते मंदिरों के कपाट रहे बंद, घरों में ही लोगों ने की पूजा

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जगाधरी। साल का दूसरा व अंतिम सूर्यग्रहण मंगलवार को लगा। सूर्यग्रहण शाम चार बजकर 29 मिनट पर शुरू हुआ और पांच बजकर 22 मिनट तक जारी रहा। करीब एक घंटे के ग्रहण की अवधि में लोगों ने कोई धार्मिक व अन्य कार्य नहीं किए। वहीं ग्रहण के चलते मंगलवार को जिलेभर के मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। शाम साढ़े बजे तक मंदिरों के कपाट बंद रहे। पूजा व हवन के बाद लोगों के लिए मंदिर खोले गए। ग्रहण का सूतक तड़के चार बजकर 11 मिनट से शुरू हो गया था। सूतक काल 12 घंटे से अधिक समय का रहा। ज्योतिषाचार्य पंडित ललित शर्मा, वासुदेव शास्त्री, अमित शर्मा ने बताया कि ग्रहण की हमारे धर्म में पौराणिक मान्यता है। ग्रहण से पहले सूतक लग जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूतक में किसी प्रकार का धार्मिक व वैदिक कर्म नहीं होता है। सूतक अल सुबह लगने से मंदिरों के कपाट बंद रहे। ग्रहण के बाद मंदिरों में विशेष पूजा व हवन किए गए। जिसके बाद मंदिर दर्शन के लिए खोले गए। उन्होंने बताया कि मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दिन भोजन, दूध सहित अन्य खाद्य पदार्थों में भी तुलसी की पत्ती डालकर ही सेवन करना चाहिए। शाम साढ़े छह बजे के बाद दर्शन के लिए मंदिर खोले गए। ऐसे में लोगों ने घरों में ही भगवान विष्णु की पूजा और स्तुति की।
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ग्रहण से जुड़ी परंपराएं
ज्योतिषार्यों ने बताया हिंदू धर्म में ग्रहण को लेकर कुछ परंपराएं आदि काल से चली आ रही हैं। जिसका वर्णन पुराणों में भी मिलता है। ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ और सोने पर भी असर पड़ता है। उसी प्रकार एक मान्यता है भी है कि मंदिर के कपाट बंद करना। हिंदू धर्म में मंदिरों के अलावा घर में मौजूद पूजा स्थल भी कपड़ों से अच्छी तरह से ढक दिए जाते हैं।
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