संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन श्री दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने उत्तम मार्दव पालन का संकल्प किया। इस दौरान महिलाओं ने भी पाठ किया।
कुसुम लता जैन, किरण जैन, रेखा जैन, पायल जैन व रेणु जैन ने कहा कि मार्दव धर्म आत्मा अर्थात निजात्मा स्व-स्वरूप का धर्म है। जहां मृदु भाव या नम्रता नहीं है, वहां धर्म भी नहीं है। मृदुता के अभाव में किए गए नियम, व्रत, तप, दान, पूजा इत्यादि भी व्यर्थ ही माने जाते हैं। अरुण जैन, वीरेंद्र जैन, ऋषभ जैन व पंकज जैन ने कहा कि मार्दव धर्म को धारण करने या अपनाने से मान व अहंकार का मर्दन हो जाता है।
इससे विनम्रता और विश्वास प्राप्त होता है। मन राग और द्वेष से मुक्त होने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। जबकि अभिमान व्यक्ति की सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक छवि को खराब कर देता है। इस दौरान रोहित जैन, अनु जैन, दीपक जैन, नीरज जैन व गौरव जैन भी मौजूद रहे।