फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Yamuna Nagar News: हर दिन बढ़ रही भीड़, दान पात्रों से निकल रहे डॉलर व विदेशी सिक्के

विज्ञापन
विज्ञापन
कपालमोचन। कपालमोचन मेला हर बीतने के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ भी बढ़ती जा रही है। पंजाब, हरियाणा व अन्य राज्यों से श्रद्धालु ट्रकों, बसों व अपने वाहनों पर सवार होकर मेले में पहुंच रहे हैं। मेले में आए श्रद्धालु यहां के मंदिरों में भी दिल खोल कर दान कर रहे हैं।
विज्ञापन

मंदिरों में रखे दानपात्रों से अमेरिकन डॉलर निकल रहे हैं। इतना ही नहीं दानपात्रों से चीन, न्यूजीलैंड व डेनमार्क समेत कई देशों के सिक्के निकलने से कर्मचारी भी हैरान हैं। अब चलन से बाहर हो चुके 10 व 20 पैसे के सिक्के भी श्रद्धालुओं ने मंदिरों में चढ़ाए हैं। शुक्रवार को मंदिरों में रखे दानपात्रों से करीब दो लाख 56 हजार रुपये निकले थे। वहीं शनिवार को करीब तीन लाख रुपये से ज्यादा का चढ़ावा निकलने का अनुमान था। सूरजकुंड सरोवर पर स्थित श्राईन बोर्ड के कार्यालय में दान राशि गिरने के लिए 20 कर्मचारी व छह अधिकारी लगाए गए हैं।

प्रदर्शनी में खाली मंच कर रहा निराश
मेला में प्रशासनिक खंड के सामने प्रदर्शनी लगाई गई है। इसके बीचोबीच एक पंडाल लगा है जिसमें सामने मंच बना है। दावा तो यह किया गया था कि इस पंडाल में दिन व रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। परंतु दो दिन से दिन में इसमें कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। शुक्रवार रात ही इसमें कार्यक्रम हुआ था। श्रद्धालु घूमते हुए प्रदर्शनी में आते हैं और खाली कुर्सियों को देख कर वापस लौट जाते हैं। यही वजह है कि श्रद्धालु प्रदर्शनी का भी ठीक से लुत्फ नहीं उठा पा रहे हैं। मेले में इस बार कहीं मेटल डिटेक्टर नहीं लगाया जाना भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
विज्ञापन


श्रद्धालु खरीद रहे बर्तन
ऐसी मान्यता है कि कपालमोचन मेेले में बर्तन खरीद कर घर ले जाने से घर में बरकत बनी रहती है। श्रद्धालु गीता, डाॅली ने बताया कि वह पिछले 27 सालों से मेले में आती है ओर मेले के दौरान बर्तन अवश्य लेकर जाती हैं। बर्तन खरीदने से परिवार में बरकत बनी रहती है।इसलिए मेले में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु बर्तन को अवश्य शामिल करता है। बर्तन खरीद की परंपरा से स्थानीय दुकानदार भी हजारों रुपये की कमाई करते हैं।


पीढ़ी से चलता है वंश
मेले में आने वाले श्रद्धालु परिवार को आगे बढ़ाने के लिए पीढ़ी की खरीद भी करते है। श्रद्धालु आदर्श ने बताया कि मेले से पीढ़ी खरीदने से वंश आगे बढ़ता है। इसलिए अधिकतर श्रद्धालु पीढ़ी को अपने साथ लेकर जाते है।


पेड़ की जगह ग्रील पर बांध रहे सूत
सूरजकुंड सरोवर पर प्राचीन कदंब का पेड़ है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण इस पेड़ पर बैठकर बांसुरी बजाते थे। इस पर जो भी सच्चे मन से सूत बांधता है तो उसकी मुराद पूरी होती है। परंतु इस बार प्रशासन ने कदंब समेत कई पड़ों के चारों तरफ लोहे की ग्रील लगवा दी है। जिस कारण श्रद्धालु पेड़ पर सूत नहीं बांध पाए। लोगों ने ग्रील पर ही सूत बांध कर पूजा अर्चना की।


लारा घोड़े ने हर किसी को किया अकर्षित
कई साल के बाद कपालमोचन मेला में खच्चर मंडी लगी है। बिलासपुर-चौराही रोड पर लगी खच्चर मंडी में उम्मीद के मुताबिक पशु नहीं आए हैं। फिर भी पंचकूला के रायपुर रानी से मंडी में आया नुकरा नस्ल का घोड़ा लारा सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इसके मालिक बलजीत ने बताया कि लारा की उम्र नौ साल है। वह रोजाना 10 किलो दाना व 30 लीटर पानी पीता है। लारा अब तक छह बार पुरस्कार जीत चुका है। वह इसे बेचना नहीं चाहते इसलिए इसकी कोई कीमत नहीं है। रजनीश प्रजापत ने बताया कि मेले के आयोजन को लेकर पशुपालकों को देरी से सूचना मिलने के कारण कम संख्या में पशु पालक पहुंचे है। पशु मेले के आयोजन को लेकर प्रशासन द्वारा पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं करवाई गई। उन्हें खेतों के पास पड़ी खाली भूमि पर पशु खड़े करने पड़े।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी लिया प्रबंधों का जायजा
कपालमोचन मेला में श्रद्धालुओं के लिए किए गए प्रबंधों एवं व्यवस्थाओं का भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश सपरा ने भी जायजा लिया। उन्होंने मेला प्रशासक एवं एसडीएम बिलासपुर जसपाल सिंह गिल, बीडीपीओ जोगेश कुमार व अन्य अधिकारियों से मुलाकात की। मेला परिसर में किया जा रहे इन इंतजामों पर संतुष्टि जाहिर करते हुए कहा कि डीसी कैप्टन मनोज कुमार, एसडीएम जसपाल सिंह गिल, बीडीपीओ जोगेश कुमार सहित सभी अधिकारी मुस्तैदी से कार्य कर रहे हैं।


बदन दर्द से जूझ रहे श्रद्धालु:
मेला में आए श्रद्धालु बदन दर्द, बुखार व खांसी से जूझ रहे हैं। वह पंजाब समेत अन्य राज्यों से सैकड़ों किलोमीटर का सफर करके मेले में आ रहे हैं। इसके बाद मेला में भी घूम रहे हैं। इसलिए ज्यादातर श्रद्धालुओं को बदन व टांगों का दर्द परेशान कर रहा है। मेला परिसर में आयुष विभाग के ऋणमोचन सरोवर पर लगे शिविर में ही तीन दिनों में 1250 से अधिक लोग दवाइयां ले चुके हैं। जबकि अन्य शिविरों में भी दवाई लेने लोग पहुंच रहे हैं।

वालंटियर के तौर लगाए हैं बच्चे
कपालमोचन, आदिबद्री में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए स्कूली बच्चों को सेवा के रूप में वालंटियर लगाया गया है। वह श्रद्धालुओं को किसी तरह की समस्या आने पर मदद करेंगे। एसडीएम जसपाल सिंह गिल ने भी वालंटियर से बातचीत की। गिल ने बताया कि बिलासपुर के राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के 100 से अधिक विद्यार्थी वालंटियर के तौर पर मेले में अपनी सेवाएं सेवा के रूप में दे रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों को आवश्यकता अनुसार सहायता कर उन्हें श्रद्धा की डुबकी में मदद करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें