संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर के नालों की सफाई के दिए ठेके में छूटे छोटे नालों की सफाई खुद नगर निगम अपने स्तर पर कराएगा। इसके लिए शहर के सभी 22 वार्डों को 11-11 वार्ड के दो जोन में बांटकर अलग से नगर निगम के 30 सफाई कर्मियों की टीम बना दी गई है। इस तरह हर जोन में 15-15 सफाई कर्मी छोटे नालों की सफाई पर लगा दिए हैं। दावा है कि छोटे नाले भी मानसून की बारिश से पहले साफ कर दिए जाएंगे।
नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी की ओर से इस बार मानसून सीजन के मद्देनजर शहर के 32 नालों की सफाई का 50.33 लाख रुपये में ठेका दिया गया है। गत वर्ष मानसून सीजन से पूर्व 1.42 करोड़ रुपये में शहर के 104 नालों की सफाई का ठेका दिया गया था। इस तरह गत वर्ष से सफाई ठेके में करीब 72 नाले कम होने पर सवाल उठे।
निवर्तमान पार्षदों ने आरोप लगाए कि उक्त 72 नाले न ठेके पर एजेंसी साफ कर रही है और न नगर निगम अपने कर्मचारी लगाकर इन्हें साफ कर रहा है। उक्त 72 में से ज्यादातर नालों को गंदगी से अटा देख शहर में मानसून की बारिश के दौरान जलभराव आशंका थी। अमर उजाला में 20 जून के अंक में साफ नहीं होंगे 72 नाले, जलभराव तय शीर्षक से समाचार प्रकाशित होने पर निगम अफसर हरकत में आए और उक्त नालों की सफाई में निगम के सफाई कर्मचारी लगा दिए हैं।
इसके लिए कुल 22 वार्डों में 11-11 के दो जोन बनाए हैं। इनमें 1 से 11 वार्ड तक का एक जोन व 12 से 22 तक के वार्ड का दूसरा जोन है। इनमें छोटे नालों की सफाई के लिए करीब 30 सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। ऐसे हर जोन में 15-15 सफाई कर्मी छोटे नालों की सफाई पर लग गए हैं। शहर के बड़े व मध्यम नालाें की सफाई पर ठेकेदार के 70 कर्मचारी कर रहे हैं। इस तरह कुल सौ कर्मचारी नालों की सफाई पर हैं।
साथ ही मानसून की बारिश के दौरान निचले इलाकों में जलभराव से बचाव के लिए पंप सेट का भी प्रबंध कर लिया गया है। नगर निगम आयुक्त आयुष सिन्हा ने कहा कि पूरा प्रयास है कि मानसून की बारिश से पहले सभी नालों की सफाई का काम पूरा कर लिया जाए। इस संबंध में निगम अफसरों को नियमित निगरानी व पुख्ता प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं।