संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा मरीजों और उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में पिछले करीब दो साल से न तो पार्किंग की सुविधा है और न ही कैंटीन संचालित हो रही है। दो साल में विभागीय अधिकारी कैंटीन और पार्किंग की निविदा की शर्तें तक तय नहीं कर पाए हैं।
इससे अस्पताल को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। कैंटीन और पार्किंग से हर माह मिलने वाला किराया बंद होने से अब तक करीब 35 लाख रुपये अस्पताल के खाते में आने से रह गए।
दो साल पहले पार्किंग का मासिक किराया करीब 60 हजार रुपये था, जो नए टेंडर में बढ़ना था। इससे ज्यादा किराया कैंटीन का था। अस्पताल में पार्किंग का ठेका 31 मार्च 2024 को समाप्त हो गया था। इसके बाद से अब तक नया ठेका आवंटित नहीं किया जा सका है। हालांकि टेंडर न होने से मरीजों को फायदा है, क्योंकि पार्किंग के पैसे नहीं देने पड़ेंगे।
परंतु ठेका न होने के कारण अस्पताल परिसर में अव्यवस्था का माहौल है। पार्किंग की नियमित व्यवस्था न होने से मरीजों और उनके परिजनों के वाहन इमरजेंसी गेट से लेकर अन्य प्रवेश द्वारों तक खड़े दिखाई देते हैं। कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि गंभीर मरीज को लेकर आने वाली एंबुलेंस को अस्पताल परिसर में प्रवेश करने में दिक्कत होती है।
इससे इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल के अंदर और रास्तों पर खड़े ऑटो व ई-रिक्शा चालक समस्या को और बढ़ा देते हैं। एक बार पार्किंग का टेंडर जारी किया गया था, लेकिन उसमें ऐसी शर्तें जोड़ दी गईं जिन्हें पूरा करना हर किसी के बस की बात नहीं थी।
वहीं अस्पताल में कैंटीन की सुविधा न होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों और यहां भर्ती रोगियों को चाय, भोजन और अन्य आवश्यक खाने-पीने की वस्तुओं के लिए अस्पताल से बाहर बाजार का रुख करना पड़ता है। मरीजों से मिलने बड़ी संख्या में रिश्तेदार भी पहुंचते हैं। ऐसे में उनके लिए भी खाने-पीने की कोई व्यवस्था परिसर में उपलब्ध नहीं है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है।
रोजाना 2100 से अधिक मरीजों की ओपीडी
सरकार ने 200 बेड के जिला नागरिक अस्पताल का जब से नया भवन बनाया तब से मरीजों की ओपीडी काफी बढ़ गई है। अब अस्पताल में रोजाना औसतन 2100 या इससे अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। करीब 60 प्रतिशत मरीज अपने वाहनों पर आते हैं। अस्पताल के नए भवन में गेट से एंट्री करते ही मरीजों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गई है। कोई भी वहां वाहन खड़ा नहीं करता है।
जिला अस्पताल में पार्किंग का टेंडर लगाने की प्रक्रिया चल रही है। इसकी कुछ शर्तों में संशोधन किया जा रहा है। वहीं जिस जगह पर पहले कैंटीन थी वह नीची हो गई है, जिसमें बारिश का पानी भर जाता है। दूसरी जगह देखी जा रही है। जल्द ही दोनों के टेंडर हो जाएंगे। -डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग।