संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गांव घिलौर व घिलौर मघरा के पास 20 एकड़ में आईओसी जीपीएस रिन्यूएबल प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से लगाया जाने वाला कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट अब नहीं लगेगा। इस बायोगैस प्लांट से गांव में फैलने वाली दुर्गंध और लोगों को होने वाली दिक्कत को देखते हुए वीरवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी ने बायोगैस प्लांट को कहीं और शिफ्ट करने करने के निर्देश दिए।
मंत्री बेदी जिला सचिवालय में जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। यह मामला 25 दिसंबर 2025 को कष्ट निवारण समिति की बैठक में आया था। एसडीएम रादौर नरेंद्र सिंह ने इस मामले की जांच के बाद बैठक में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिसके आधार पर मंत्री ने प्लांट को गांव से कहीं और ले जाने के निर्देश दिए।
दरअसल घिलौर गांव के सरपंच सतीश कुमार व अन्य लोगों ने शिकायत दी थी कि उनके और घिलौर मघरा के बीच में कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाने की तैयारी हो रही है। इससे गांव में गंदगी फैलेगी और प्रदूषण के अलावा मक्खी-मच्छरों की संख्या बढ़ेगी। इस पर 25 दिसंबर को हुई बैठक में एसडीएम रादौर नरेंद्र सिंह को समिति सदस्य हेमराज, विक्रम व रविंद्र के साथ मौके पर जाकर जांच करने को कहा था।
एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सभी लोगों की एक राय है कि बायोगैस प्लांट को आबादी से दूर कहीं और शिफ्ट किया जाए। आबादी के पास होने से लोगों को गोबर की दुर्गंध, ध्वनि प्रदूषण, प्लांट से निकलने वाली गैस से लोगों को काफी परेशानी होगी। कंपनी की तरफ से तर्क दिया गया कि यह प्लांट व्हाइट केटेगरी की श्रेणी में आता है। इससे कोई प्रदूषण नहीं फैलेगा। घिलौर गांव से इस प्लांट की दूरी 450 से 500 फीट व गांव मघरा से महज 70 फीट है। इसलिए प्रस्तावित प्लांट को गांव से शिफ्ट किया जाना ही उचित होगा।