कैथल। वक्फ बोर्ड के संशोधन में लाखों लोगों की राय ली गई है। शायद यह पहला ऐसा बिल होगा, जिस पर काफी व्यापक मंथन हुआ और लंबी बहस चली और वह पारित हो गया।
वक्फ में पहले पारदर्शिता नहीं थी, दस्तावेज नहीं थे, यह कुछ मजहबी और कुछ सियासती माफिया का अड्डा बन चुका था। इससे मुसलमान को कोई भी कल्याणकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा था और इतने वर्षों में कोई समाज हित का काम भी नहीं हुआ। यह दावा आरएसएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने कैथल में एक कार्यक्रम में प्रेसवार्ता में किया है। कहा कि जो माफिया था उससे इस बिल के माध्यम से वक्फ बोर्ड को पूर्ण रूप से मुक्ति मिली है।
उन्होंने कहा कि मुसलमान में एक तरह का भय का माहौल बना रखा था। इसलिए मुसलमान और वक्फ बोर्ड को कांग्रेस और ऐसे ही अन्य दल व मजहबी नेताओं से भय मुक्ति मिली है। अब वक्फ बोर्ड की आमदनी से मुसलमानों की कल्याणकारी योजनाएं बनेगी। इंद्रेश ने कहा कि देश की आजादी के बाद भारत का मुसलमान पहली बार हैप्पी ईद मना रहा है। देश में मजहब के नाम पर जो दंगे भड़काए जाते थे वे भी बंद हो जाएंगे।
जो लोग इस बिल को लेकर कोर्ट में गए हैं, वे संसद में अपना पक्ष कानून के रूप में नहीं रख सके। इसके विपरीत जो लोग इस बिल के ऊपर भड़काने का काम कर रहे थे उनका पर्दाफाश हुआ है। कहा कि इससे दंगा मुक्त भारत बनने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
वक्फ बोर्ड को आमदनी सबसे ज्यादा हिंदुओं से है। यह बिल उच्चतम न्यायालय में गया है, इसका क्या होगा, यह समय बताएगा। बिल का फैसला तो न्यायालय को करना है कि बिल गिरेगा या नहीं गिरेगा।