संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर/रादौर। श्रीराधा गोपाल मंदिर के पुजारी जितेंद्र द्विवेदी ने श्रद्धालुओं को प्रवचन करते हुए कहा कि राम शब्द में दो अर्थ व्यंजित हैं। सुखद होना और ठहर जाना। जैसे अपने मार्ग से भटका हुआ कोई पथिक किसी सुरम्य स्थान को देखकर ठहर जाता है। हमने सुखद ठहराव का अर्थ देने वाले जितने भी शब्द गढ़े, सभी में राम अंतर्निहित है।
उन्होंने बताया ति यथा आराम, विराम, विश्राम, अभिराम, उपराम, ग्राम जो रमने के लिए विवश कर दे, वह राम हैं। जीवन की आपाधापी में पड़ा अशांत मन जिस आनंददायक गंतव्य की सतत तलाश में है, वह गंतव्य है राम। राम भी इतने सरल हैं कि हर जगह खड़े हो जाते हैं। हर भारतीय उन पर अपना अधिकार मानता है। जिसका कोई नहीं उसके लिए राम हैं।
उन्होंने कहा कि असंख्य बार देखी सुनी पढ़ी जा चुकी रामकथा का आकर्षण कभी नहीं खोता। राम पुनर्नवा हैं। हमारे भीतर जो कुछ भी अच्छा है, वह राम है। जो शाश्वत है, वही राम हैं। सबकुछ लुट जाने के बाद जो बचा रह जाता है, वही तो राम है। घोर निराशा के बीच जो उठ खड़ा होता है, वह भी राम ही है।