यदि प्रशासन ने थोड़ी समझदारी दिखाई होती तो अनिल खेड़ा के परिजनों को चंचल और आहाना के शव भी मिल गए होते और परिजन उनके अंतिम दर्शन कर विधिवत संस्कार कर लेते।
रविवार रात को नहर में कार का पता चलने के बावजूद प्रशासन ने रेसक्यू ऑपरेशन नहीं चलाया और सुबह होने का इंतजार करते रहे।
रविवार रात को करीब 9:30 बजे बाड़ी माजरा पुल के समीप नहर में कार गिरने के बाद मौके पर डीसी मंदीप सिंह बराड़, एसपी शशांक आनंद और अन्य अधिकारी भी पहुंच गए थे।
गोताखारों ने करीब दो घंटे तक नहर में कार को तलाशा, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। इसके बाद डीसी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से नहर का पानी कम करने के लिए बात की। इसके कुछ देर बाद बारिश शुरू हो गई और डीसी और एसपी घटनास्थल से वापस रवाना हो गए।
लेकिन निजी गोताखोर राजीव और सुखराम अन्य गोताखोरों के साथ नहर में कार को तलाशते रहे। रात करीब 11:30 बजे गोताखोर राजीव ने बाड़ी माजरा पुल से करीब 50 मीटर आगे नहर में कार का पता लगा लिया।
इसके बावजूद रात में कार को नहर से बाहर निकालने के लिए रेसक्यू ऑपरेशन नहीं चलाया गया। उस समय मौके पर क्रेन भी मौजूद थी।
यदि सर्च लाइट्स और गोताखोरों की मदद से रात में ही कार पानी से बाहर निकाल ली जाती तो खेड़ा परिवार को चंचल और आहाना के शव भी निश्चित तौर पर मिल जाते।
शव न मिलने से बढ़ा खेड़ा परिवार का दर्द
पश्चिमी यमुना नहर में कार समेत गिरे अनिल खेड़ा के परिवार की मौत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। जिसे भी इस हादसे का पता चला, वह सन्न रह गया।
खेड़ा परिवार का दर्द मंगलवार को और अधिक बढ़ गया, जब नहर में कई घंटों की तलाश के बाद चंचल खेड़ा और तीन साल की आहाना का कुछ पता नहीं चल सका।
इन दोनों के बचने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी है। इसके बावजूद तलाश में परिजन दिन भर नहर में कई किलोमीटर दूर तक दोनों की तलाश करते रहे।
गोताखोर सुखराम और राजीव को साथ लेकर खेड़ा परिवार के सदस्य हमीदा हेड, आवर्धन नहर से आगे इंद्री होते हुए मुनक हेड तक नहर में दोनों को तलाशा।
नहर के दोनों किनारों पर झाड़ियों को भी खंगाला गया, लेकिन चंचल और आहाना का कुछ पता नहीं चल पाया।
परिजन भी यह मान रहे हैं कि अब इन दोनों का जिंदा मिल पाना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।
परिजनों को टीस इस बात की है कि 48 घंटे बीत जाने के बाद भी उनके शव भी नहीं मिल पा रहे हैं।