संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सफाई व्यवस्था का जिम्मेदार नगर निगम शहर को स्वच्छ बनाने में पिछड़ रहा हैं। हालात ये हैं कि त्योहारों के बीच गलियों और सड़कों पर कचरा बिखरा है। इसकी बड़ी वजह नियमित डोर-टू-डोर कचरा उठान न होना है, क्योंकि इसका टेंडर पांच माह से सिरे नहीं चढ़ पाया है, उधर इस काम के लिए नगर निगम के पास स्टाफ व संसाधन कम हैं। ऐसे में कचरा उठान के लिए कचरा गाड़ियां कई दिन पहुंच रही हैं। इससे लोग कचरे को गलियों-सड़कों में गिराने पर मजबूर हैं।
डोर-टू-डोर कचरा उठान के काम का पुराना ठेका एक जोन में मार्च तो दूसरे जोन में अप्रैल में खत्म हो गया था। एक जोन में पुराना ठेका खत्म होने पर नगर निगम अफसरों ने मार्च में सभी 22 वार्डों का एक जोन बनाकर करीब 29 करोड़ एस्टिमेट पर टेंडर लगाया था। पार्षदों व निगरानी कमेटी ने इस काम का टेंडर एक जोन में होने पर विरोध कर दिया। तब एक जोन में किया टेंडर रद कर सात जोन में टेंडर करने का प्रस्ताव यूएलबी भेजा गया, पर उस पर मंजूरी नहीं मिली। तब चार जोन बनाकर टेंडर की योजना बनी, लेकिन ये भी धरी रह गई और पिछले वर्ष की तरह दो जोन बनाकर टेंडर लगे। यह भी पिछले दो माह से पूरी नहीं हो पाई है।
पांच माह से टेंडर न होने डोर टू डोर कचरा उठान का काम नगर निगम स्वयं अपने स्तर पर करवा रहा है, पर इसके लिए उसके पास स्टाफ व संसाधन कम है। ऐसे में डोर टू डोर कचरा उठान भी निगम के पास आ जाने से वर्कलोड बढ़ गया है। करीब 1800 सफाई कर्मियों की मांग है, पर 700 कर्मी ही हैं। निगम के 60 में से 30 टिपर खराब पड़े हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मॉडल टाउन व अन्य पॉश क्षेत्रों में कचरे के ढेर दिख रहे हैं।
अफसरों की गलती, भुगत रहे लोग
वार्ड-4 से पार्षद देवेंद्र सिंह व वार्ड-8 से पार्षद विनोद मरवाह, वार्ड-20 से पार्षद प्रतिनिधि नीरज राणा ने कहा कि बिगड़ी सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम अफसर कसूरवार हैं। जिन्होंने डोर-टू-डोर कचरा उठान का पिछला ठेका खत्म होने से पहले नए टेंडर लगाने में देरी की। ठेका खत्म होने पर लगाया सिंगल टेंडर भी बिना पार्षदों की राय पर लगा, जिसे रद करना पड़ा। अफसरों की इसी गलती का खामियाजा लोग भुगत रहे हैं।
डोर-टू-डोर कचरा उठान के टेंडर में कई एजेंसियां से बिड आई हैं। जल्द यह प्रक्रिया पूरी होगी और कचरा उठान को लेकर आ रही समस्या खत्म होगी। - सुरेंद्र चोपड़ा, सीएसआई, नगर निगम।