संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के 84वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने 27 दिवसीय तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ के जाप की शृंखला में शनिवार का जाप संपन्न कराया। साध्वी ने दान के प्रकार व महत्व बताए।
उन्होंने कहा कि जैन दर्शन अनुसार दान चार प्रकार के माने जाते हैं। आहार दान, औषधि दान, अभय दान व ज्ञान दान। चारों दानों में तीन दान यानी आहार दान, औषधि दान, अभय दान तो तात्कालिक क्षुधा के दुख या रोग के दुख या मरणादिक भय के दुख को दूर करते हैं। जो ज्ञान दान है, वह जन्म-मरण के दुखों को दूर करने का प्रमुख कारण है।
सभी दान अपनी-अपनी अपेक्षा से श्रेष्ठ हैं, पर ज्ञान दान को आध्यात्मिक दृष्टि से उत्कृष्ट माना जा सकता है। जिसे ज्ञान अभ्यास हो, वह अपना भला तो कर ही सकता है और अन्य जीवों का भी भला कर सकता है। संसार में प्रचलित सभी तरह के दान का आधार ज्ञान ही है। ज्ञान से ही हम निर्णय कर सकते हैं कि दान का पात्र, विधि, उसके लिए किस द्रव्य की आवश्यकता है।
जीवों के सात भयों को दूर करने की जानकारी ज्ञान से प्राप्त कर उन्हें अभयदान दे सकते हैं। एसएस जैन सभा के प्रधान राकेश जैन ने बताया कि 13 अक्तूबर को भगवान पार्श्वनाथ अनुष्ठान पूर्णाहुति दिवस होगा। कार्यक्रम में पाठ के सभी लाभार्थी व बाहर से जैन समाज के लोग भी शिरकत करेंगे। ध्वजारोहण कार्यक्रम सुबह 10 बजे विधायक घनश्याम दास अरोड़ा करेंगे।