सरकार की शिक्षा नीतियों के विरोध में चल रही अध्यापकों की भूख हड़ताल शनिवार को भी जारी रही। अध्यापकों की भूख हड़ताल को 28 दिन हो गए हैं। इस दौरान अध्यापकों ने सरकार के उदासीन रवैये को लेकर जमकर नारेबाजी की। भूख हड़ताल का नेतृत्व नूहं जिला प्रधान फूल कुमार ने किया। फूल कुमार के साथ सत्येंद्र, वेद सिंह, शमशेर व यमुनानगर खंड रादौर प्रधान मनीष तंवर भूख हड़ताल पर बैठे। यह भूख हड़ताल हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के बैनर तले लघु सचिवालय के सामने अनाज मंडी गेट पर 23 अप्रैल से चल रही है।
इस दौरान जिला प्रधान संजय कांबोज, सीटू नेता विनोद त्यागी, वीरेंद्र रंगा ने मालाएं पहना कर साथियों को भूख हड़ताल पर बैठाया। यहां अध्यापक नेताओं ने कहा कि सरकार शुरुआत से ही शिक्षा की अनदेखी कर रही है। नए स्कूल खोलने की बात हो या शिक्षा बजट, ढांचागत सुविधाएं देने की बात हो या खाली पदों पर भर्ती सभी मामलों में सरकार ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। प्रदेश में अध्यापकों के 50 हजार पद रिक्त हैं। सैकड़ों स्कूलों में एक ही अध्यापक है। सरकार अध्यापकों से गैर शैक्षणिक करवाकर विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। नई शिक्षा नीति में भी स्कूल बंद करने, स्वयं सेवी संस्थाओं की दखलंदाजी, निजी स्कूलों को बढ़ावा देने, ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर विद्यार्थियों को अध्यापकों से दूर किया जा रहा है। वैज्ञानिक सोच आधारित पाठ्यक्रम से छेड़छाड़ कर अंधविश्वास आधारित पाठ्यक्रम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार शिक्षा निम्न व जरूरतमंद लोगों की पहुंच से दूर कर रही है। मॉडल संस्कृति स्कूलों में दाखिला व मासिक फीस लागू की गई है।
जिला प्रधान संजय कांबोज ने कहा कि अध्यापक सार्वजनिक व मौलिक शिक्षा अधिकार को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इससे बिल्कुल भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं करेगी, उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी।