लघु सचिवालय के सामने अनाज मंडी में चल रही अध्यापकों की भूख हड़ताल 36वें दिन भी जारी रही। इस दौरान अध्यापकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अध्यापकों की भूख हड़ताल हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के आह्वान पर चल रही है। जिसमें प्रदेशभर के अध्यापक शामिल हैं। रविवार को भूख हड़ताल का नेतृत्व कैथल के खंड गुहला प्रधान रामपाल ने किया। जबकि उनके साथ वीरेंद्र शर्मा, गुरमीत सिरोही, जरनैल सिंह व गुरुदेव सिंह भी भूख हड़ताल पर बैठे। राज्य सचिव जगपाल सिंह, जिला ऑडिटर गोविंद सिंह भाटिया, सीटू नेता विनोद त्यागी ने माला पहनाकर अध्यापकों को अनशन पर बैठाया। इस दौरान नेताओं ने कहा कि अध्यापकों की भूख हड़ताल को 36 दिन हो हैं। परंतु सरकार शिक्षा से इसे गंभीरता से नहीं ले रही है। सरकार शिक्षा विरोधी नीतियां लागू कर रही है। नेताओं ने कहा कि चिराग योजना सार्वजनिक शिक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। हर बच्चे को शिक्षा देना राज्य का कर्तव्य संविधान के निहित है। केंद्र सरकार व राज्य सरकारों का दायित्व है कि हर बच्चे को बिना भेदभाव के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से शिक्षा का मूल ढांचा नष्ट हो रहा है। सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों से दाखिला व मासिक फीस ली जा रही है। प्रदेश में 50 हजार शिक्षक पद खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि अध्यापकों की मांग है कि मॉडल संस्कृति स्कूलों में फीस लेनी बंद की जाए, बच्चों को मिले वाली सभी मुफ्त सुविधाएं समय पर दी जाए, 2017 में लगे अध्यापकों को स्थायी जिले आवंटित किए जाए, पीएफआरडीए बिल रद्द करके पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए।