संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर को आने वाले 50 वर्षों तक जलभराव की समस्या से राहत दिलाने के उद्देश्य से नगर निगम ने व्यापक मास्टर प्लान तैयार करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। योजना के तहत निगम द्वारा नियुक्त विशेष एजेंसी यश इनोवेटिव सॉल्यूशन ने शहर में विस्तृत सर्वे शुरू कर दिया है।
प्रथम चरण में वार्ड नंबर एक से सात तक जल निकासी व्यवस्था, सीवरेज नेटवर्क और जलभराव वाले क्षेत्रों का गहन अध्ययन किया जा रहा है। सर्वे कार्य की प्रगति को लेकर मेयर सुमन बहमनी ने नगर निगम अधिकारियों, एजेंसी के प्रतिनिधियों और संबंधित वार्डों के पार्षदों के साथ बैठक की। बैठक में वार्ड नंबर एक से सात तक के पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति से एजेंसी को अवगत कराया।
उन्होंने स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज लाइन, सीवरेज नेटवर्क, नालों की स्थिति तथा मानसून के दौरान जलभराव वाले संवेदनशील स्थानों की विस्तार से जानकारी दी, ताकि मास्टर प्लान में इन सभी बिंदुओं को शामिल किया जा सके। बैठक के दौरान कार्यकारी अभियंता विकास धीमान और एजेंसी के तकनीकी विशेषज्ञों ने ड्रेनेज व्यवस्था अधिक प्रभावी बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
चर्चा में मुख्य नालों, सीवरेज और स्टॉर्म वाटर ड्रेन के आपसी समन्वय के साथ पानी की निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा ड्रेनेज सिस्टम में स्क्रीन जाल लगाने जैसे तकनीकी सुझावों पर भी विचार-विमर्श किया गया, ताकि कचरे के कारण नालों के जाम होने की समस्या को कम किया जा सके।
मेयर सुमन बहमनी ने कहा कि यह परियोजना यमुनानगर के सुरक्षित और सुनहरे भविष्य की आधारशिला साबित होगी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जाने वाला यह मास्टर प्लान शहर को अगले 50 वर्षों तक बाढ़ और जलभराव जैसी समस्याओं से काफी हद तक सुरक्षित रखने में मदद करेगा।
उन्होंने सभी पार्षदों और आम नागरिकों से अपील की कि वे क्षेत्र में आने वाली सर्वे टीमों का पूरा सहयोग करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं। बैठक में कार्यकारी अभियंता विकास धीमान, सहायक अभियंता राजेश शर्मा, कनिष्ठ अभियंता गोपाल सैनी, पार्षद रीना रस्तोगी, अरुण कुमार, जयंत स्वामी, रूचि कंबोज, भानू प्रताप, अंकित कुमार, प्रियांक शर्मा तथा एजेंसी के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
पार्षदों से समन्वय बनाए रखे एजेंसी : मेयर
मेयर ने एजेंसी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वे के दौरान संबंधित वार्डों के पार्षदों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी संवेदनशील क्षेत्र सर्वे से छूटने न पाए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के अनुभव और स्थानीय जानकारी से ही शहर के लिए मजबूत और दीर्घकालिक जल निकासी व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।