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फिर डल सकता है खनन में अड़ंगा, सरकार के खिलाफ कोर्ट जाएगी कमेटी

Thu, 17 Mar 2016 12:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
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सवोऱच अदालत - फोटो : yamunanagar
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यमुनानगर/छछरौली। बेलगढ़ बांध और क्षेत्र के 50 गांवों को बाढ़ बचाने के लिए ग्रामीण एकजुट हो रहे हैं। इसे लेकर बुधवार को गांव लाक्कड़ में पंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें सरकार द्वारा क्षेत्र में खनन खोलने पर ग्रामीणों ने गुस्सा जताया। पंचायत में निर्णय लिया गया कि सरकार के फैसले के खिलाफ ग्रामीण कोर्ट जाएंगे। इसके लिए पंचायत में 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। पंचायत की अध्यक्षता कांग्रेसी नेता भोपाल सिंह भाटी ने की।
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उन्होंने कहा कि एनजीटी के फैसले के कारण ही 45 दिन से यमुना नदी में सहारनपुर व यमुनानगर में खनन पर रोक लगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मिलीभगत से बेलगढ़ बांध एरिया में खनन खोलने पर विचार चल रहा है। अगर यहां खनन पर लगी रोक हट गई और टेंडर हो गए तो करोड़ों रुपये की लागत से बना बेलगढ़ बांध व पटरी टूट जाएगी। यह बांध व पटरी लगभग 50 गांवों के लिए जीवन रक्षक की भूमिका निभाते हैं। इसलिए इसके आस पास क्षेत्र में खनन करने ठीक नहीं है। सरकार फिर बेलगढ़ के आस-पास खनन खोलने चाह रही है, जिसे 50 गांवों के लोग कभी कामयाब नहीं होने देंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस जोन में कृषि योग्य भूमि को भी चिंहित किया गया है। यहां नदी नहीं समतल जमीन है। कलेसर नेशनल पार्क का एरिया भी नजदीक पड़ता है। खनन होने से इस बांध व पटरी का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। कांग्रेस नेता मोहन वर्मा जयमरापुर ने कहा कि सरकार व अधिकारी ग्रामीणों की सुनवाई नहीं कर रहे हैं। इसलिए ग्रामीणों ने यह कदम उठाया है। पंचायत में सर्वसम्मति से 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल कर बेलगढ़ में खनन पर पूर्णता रोक लगाने की मांग करेगी।
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दस साल पहले का दर्द भी छलका:
वर्ष 2005 में यमुना नदी में सिर्फ 60 हजार क्यूसिक पानी आया था, लेकिन इससे आस पास के 50 गांवों में तबाही मची थी। पंचायत में दस साल पहले का दर्द व बेबसी भी ग्रामीण के चेहरे पर सफाई दिखाई दी। बाढ़ में करोड़ों की फसलें व मकान तबाह हो गए थे। तब प्रदेश सरकार ने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को छछरौली अनाज मंडी में सहारा दिया था। छह महीने का समय ग्रामीणों ने मंडी में शरणार्थी बन कर गुजारा था। तब से लेकर आज तक ग्रामीणों का जीवन पटरी पर नहीं आया। ग्रामीण मनोज कुमार का कहना है कि अगर यहां खनन शुरू करवाया गया तो बेलगढ़ बांध व पटरी को नुकसान होगा। जिसका सीधा असर इन्हीं गांवों के लोगों पर पड़ेगा।

भाटी बने 11 सदस्यीय कमेटी के कोर्डिनेटर:
सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालने वाली कमेटी का कोर्डिनेटर भोपाल सिंह भाटी को ही बनाया गया है। इसके अलावा मोहन वर्मा जयरामपुर, पूर्व सरपंच मुन्ना सिंह, जोगिंद्र सिंह, पूर्ण चंद भारती, सुनहरा सिंह, सरपंच सुशील, पितांबर सिंह, मुनीश कुमार, सरपंच नकली,  प्रेम सिंह, जयपाल सिंह, सुभाष नंबरदार तथा बलजीत सिंह को शामिल किया है। कमेटी आगे इस मामले की कोर्ट में पैरवी करेगी।

ग्रामीण जता चुके हैं आपत्तियां:  
जिले में खनन खोलने के लिए विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई कर रहा है। विभागीय प्रक्रिया के तहत छह अलग-अलग जोन में बांट कर खनन का ठेका देने की तैयारी की जा रही है। जिला प्रशासन ने बीती 9 मार्च को बेलगढ़ व बेगमपुर गांव में सार्वजनिक सभा कर सुझाव व आपत्तियां दर्ज की थी। जिसमें क्षेत्र के किसानों ने अपनी आपत्तियां दर्ज करवाई थी। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पहले भी नियमों को दरकिनार कर खनन किया जाता है। जिसका खामियाजा आस पास के गांवों के लोगों को उठाना पड़ा है।

भाजपा ने किया था खनन खोलने का वादा :
जिले में करीब दस साल से खनन पर प्रतिबंध लगा हुआ है। जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी विभागों के विकास कार्य भी कच्चा माल न मिलने की वजह से अधर में हैं। इसी तरह आम आदमी भी रेत-बजरी न मिलने से परेशान हैं। उधर, क्षेत्र में खनन शुरू होने से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा। इसलिए भाजपा ने क्षेत्र में खनन खोलने का चुनावी वादा भी किया था।
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