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Yamuna Nagar News: सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के सामने पहुंचे गन्ना किसान, बोले मिल बिके तो पहले बकाया हमारा दें

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माई सिटी रिपोर्टर
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अंबाला। नारायणगढ़ स्थित बनौंदी शुगर मिल को संबद्ध करने के मामले में 13 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट कमेटी के सामने सुनवाई हुई। कमेटी की अध्यक्षता सेवानिवृत्त जस्टिस कर रहे हैं। इस मामले में नारायणगढ़ से गन्ना किसान संघर्ष समिति सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के सामने पेश हुई। जहां गन्ना किसानों ने अपने बकाया को लेकर मत रखा।
गन्ना किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष विनोद राणा ने बताया कि उन्होंने समिति को बताया कि गन्ना किसानों को राज्य सरकार ने एरिया असाइन किया है। वह अपने गन्ना को नारायणगढ़ शुगर मिल को भी बेच सकते हैं। मिल पर करीब 45 करोड़ रुपये की किसानों की देनदारी है। जिस प्रकार से मिल बेचकर पैसा लेने वाले पक्षकार हैं। ठीक उसी प्रकार से गन्ना किसान भी एक पक्ष है, जिन्हें मिल से अपने रुपये लेने हैं।
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गन्ना किसानों ने कमेटी से आग्रह किया है कि अगर मिल कुर्क कर बेची जाती है तो उन्हें सबसे पहले उनका बकाया का भुगतान कराया जाए। क्योंकि कोर्ट जाने वाले सभी पक्षकार अपना बकाया लेना चाहते हैं उन्होंने किसी न किसी रूप से शुगर मिल के साथ बिजनेस किया है, जबकि किसानों ने मिल के साथ कोई बिजनेस नहीं किया है। इस जवाब को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है और इस मामले में 26 अप्रैल की अगली सुनवाई की तारीख दी गई है।

एक माह में मांगा जवाब

एसडीएम नारायणगढ़ और नारायणगढ़ शुगर मिल के सीईओ यश जालुका ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की समिति के सामने गन्ना किसान संघर्ष समिति ने अपनी दलीलें पेश की हैं। किसानों की दलील के लिए किसानों का आवेदन इस केस में स्वीकार कर लिया गया है। इस याचिका पर समिति ने हारको को एक माह का समय दिया है। हारको की याचिका के ऊपर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने अपना जवाब फाइल किया था, मगर इस मामले में अभी सुनवाई नहीं हुई है। इस मामले में दायर याचिका में हारको ने भी यही कहा था कि वह आंतरिक वित्तीय संस्था है, जिसने हरियाणा सरकार से वित्तीय मदद लेकर शुगर मिल को कर्ज दिया था। उनकी देनदारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अब जब किसान खुद सुप्रीम कोर्ट की समिति के पास पहुंच गए हैं तो हारको का जवाब समिति ने मांगा है।
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यह है पूरा मामला

एनएसईएल के जरिये निवेशक वेयरहाउस में रखी गई कस्टर सीड, ऊन, चीनी जैसी कमोडिटी पर 25-36 दिन के लिए लोन देते थे। इसमें 15-16 फीसदी तक का वापस मिलता था। 2014 में दलालों ने निवेशकों से जिन वस्तुओं पर पैसा लगवाया, स्टॉक में वह कमोडिटी थी ही नहीं और गोदाम खाली थे। वेयरहाउस की रसीद फर्जी थी। घोटाला सामने आने के बाद एनएसईएल एक्सचेंज बंद हो गया। इसमें 13,000 से अधिक निवेशकों का 5600 करोड़ रुपया फंसा हुआ है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड कई वर्ष पहले डूब गई थी। इस मामले में एनएसईएल से रुपये लेकर वापस न करने वालों पर केस दर्ज होने लग गए। इसी में एक कंपनी याथुरी एसोसिएट्स भी फंसी, जिन पर एनएसईएल का बकाया था। यह याथुरी एसोसिएट्स को संचालित करने वाला परिवार ही नारायणगढ़ शुगर मिल से जुड़ा था। जब मामले की जांच हुई तो कंपनी के पास एक अकाउंट नारायणगढ़ शुगर मिल से जुड़ा भी सामने आया। ऐसे में नारायणगढ़ शुगर मिल भी लपेटे में आ गई। अब याथुरी एसोसिएट्स की संपत्ति संबद्ध करने के फैसले में नारायणगढ़ मिल को भी जोड़ा गया है। इसके बाद कोर्ट ने नारायणगढ़ शुगर मिल की संपत्ति संबद्ध करने का फैसला दे दिया। जिसके बाद गन्ना किसान हरकत में आए और नारायणगढ़ में धरना दिया गया। भाकियू चढूनी ग्रुप के किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने इसको लेकर पंचायत भी की थी। तभी से यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
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