संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। राशन डिपो पर रखी गई पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन का सॉफ्टवेयर अपेडट होने के बाद लोगों की परेशानी बढ़ गई। मशीन में राशन देने की रफ्तार तो पहले से कुछ तेज हुई है, लेकिन इनमें राशन की डिटेल अपलोड नहीं हो रही है। मशीनों में अभी तक भी चीनी व सरसों के तेल का ब्योरा नहीं आया है। जिस कारण अभी तक लोगों को डिपो से सरसों का तेल व चीनी नहीं मिल पाई है।
लोगों की दिक्कत इसलिए भी बढ़ी हुई है, क्योंकि 30 सितंबर की रात 12 बजे मशीनों से फिंगर प्रिंट स्कैन होने के बाद राशन मिलना बंद हो जाएगा। जिले में करीब सवा दो लाख कार्ड धारकों को हर माह डिपो से राशन मिलता है। जिले में करीब 585 राशन डिपो हैं, जिनसे हर माह बीपीएल व एएवाई राशन कार्ड धारकों को राशन मिलता है।
फिलहाल सरकार की तरफ से लोगों को डिपो से गेहूं, चीनी व सरसों का तेल दिया जा रहा है। लोगों को इस माह का गेहूं तो मिल गया है, लेकिन चीनी व सरसों का तेल अभी तक नहीं दिया है। लोगों को पीओएस मशीन में अपने फिंगर प्रिंट स्कैन कराने पड़ते हैं, इसके बाद ही राशन मिलता है।
कुछ दिनों से पीओएस मशीनों के धीमी गति से चलने की शिकायत मिल रही थी। इस पर इसी माह खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से पीओएस मशीनों के साफ्टवेयर को अपग्रेड करवाया गया है। इससे मशीनों में राशन देने की प्रक्रिया में कुछ सुधार हुआ है।
सभी डिपो की पीओएस मशीन यह डाटा अपलोड किया जाता है कि डिपो पर इस महीने कितना राशन दिया गया है। जितने लोग राशन लेंगे इसके बाद यह भी पता चलता रहता है कि डिपो पर राशन का कितना स्टॉक बचा रहता है। पीओएस में एंट्री न होने से लोगों को सरसों का तेल व चीनी अभी तक नहीं मिल पाई है। इसके लिए लोग बार-बार अपने डिपो धारक के पास जा रहे हैं कि बाकी का राशन कब मिलेगा।
वितरण का समय बढ़े : सुशील
जिला यमुनानगर डिपो होल्डर वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुशील मित्तल, वरिष्ठ उप प्रधान बृजभूषण राणा, प्रधान गजेंद्र राणा का कहना है कि चीनी व सरसों के तेल के लिए लोग डिपो पर बार-बार चक्कर काट रहे हैं। इससे लोग परेशान हो गए हैं। कई डिपो पर तो अक्तूबर माह का राशन आने लगा है, लेकिन उन्हें अभी तक सितंबर का राशन भी नहीं मिला, जबकि इस माह के केवल चार दिन बी बचे हैं। इसलिए विभाग की ओर से राशन वितरण की तारीख को आगे बढ़ाना चाहिए।
पीओएस मशीनों की सॉफ्टवेयर को अपग्रेड किया गया है। मशीनों में गेहूं का डाटा तो अपलोड हो गया था, लेकिन चीनी व सरसों के तेल की एंट्री होनी बाकी है। इस तकनीकी कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। -जतिन मित्तल, डीएफएससी यमुनानगर।