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Yamuna Nagar News: गणतंत्र दिवस परेड के वीआईपी मेहमान होंगे सुभाष

Tue, 21 Jan 2025 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाले समारोह में इस बार खंड रादौर के हाफिजपुर गांव निवासी मधुमक्खी पालक सुभाष कांबोज वीआईपी मेहमान होंगे। वह वीआईपी गैलरी में बैठ कर गणतंत्र दिवस की परेड देखेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से सुभाष कांबोज को निमंत्रण पत्र भेजा गया है।
वह 25 से 28 जनवरी तक दिल्ली में भारत सरकार के मेहमान रहेंगे। इस दौरान उन्हें दिल्ली के प्रमुख व प्रसिद्ध स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा। दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह देखने के लिए सुभाष कांबोज काफी उत्सुक हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुभाष कांबोज को 25 जनवरी को दिल्ली बुलाया है। 25 से 28 जनवरी तक दिल्ली में होने वाले अलग-अलग कार्यक्रमों में वह हिस्सा लेंगे।
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इस दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के कार्यक्रम में भी शामिल रहेंगे। मधुमक्खी पालक प्रगतिशील किसान सुभाष कांबोज देश में 31 जुलाई 2022 को उस समय सुर्खियों में आए जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में उनका दूसरी बार जिक्र किया था और उनके मधुमक्खी पालन कार्य की सराहना की थी।
प्रधानमंत्री ने देश के अन्य किसानों को भी सुभाष कांबोज की तरह ही वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण लेकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया था। इससे पहले 2021 में भी पीएम ने मन की बात कार्यक्रम में उनके नाम का उल्लेख किया था। उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल, पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी के अलावा कृषि विज्ञान केंद्र दामला, चौधरी चरण सिंह एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी हिसार, उद्यान विभाग, आईबीडीसी रामनगर के अलावा प्रदेश व देश में कई मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है।
सन 1996 से पहले निजी स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्य कर चुके किसान सुभाष कांबोज ने बताया कि उन्होंने मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने मात्र छह बॉक्स से शहर उत्पादन का कार्य शुरू किया था। आज उनके पास दो हजार से ज्यादा मधुमक्खी पालन के बॉक्स है।
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वे स्वयं पूरे देश में शहद की बिक्री करते हैं। आज उनका शहद हरियाणा, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल के अलावा विदेशों में भी बिकता है। खासकर सरसों के फूलों से तैयार शहद को अमेरिका में भेजा जाता है। अमेरिका में इस शहद की काफी मांग है। उन्होंने अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्म निर्भर बनाया है।
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