शिक्षा विभाग ने जिले के पहली से आठवीं कक्षा के लगभग 70 हजार विद्यार्थियों को मिड-डे-मील के तहत अब दोपहर के भोजन में मिस्सी रोटी, काले चने, बेसन का पराठा और गुलगुले भी खाने देने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मौलिक कार्यालय के निदेशक की ओर से सारणी की प्रतिलिपि सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को भेज दी गई है।
विभाग के निर्देश के अनुसार हफ्ते में एक बार जो रेसिपी बन गई उसका दोहराव नहीं होना चाहिए। इसलिए पुलाव काले चने के साथ सोया पूड़ी व आलू पूड़ी और कड़ी पकोड़ा को भी दोपहर के भोजन में शामिल किया गया। विभाग की ओर से ये कवायद विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए की गई है।
नई रेसिपी की सूची में 17 प्रकार की डाइट का शेड्यूल बनाया गया है। इनमें पुलाव के साथ काले चने, रोटी के साथ घीया दाल, राजमा चावल, चावल के साथ कड़ी पकोड़ा, काले चने के साथ हलवा, बेसन का पराठा, खिचड़ी, मीठा दलिया, सोया पूड़ी व आलू के साथ सफेद चने, बेसन पुडा, दाल और चावल, रोटी के साथ मूंग मसरी की दाल, मौसम के अनुसार सब्जी के साथ मिस्सी की रोटी, स्वीट मूंगफली के साथ चावल, नमकीन दलिया आदि शामिल है। जोकि पहली और आठवीं कक्षा के बच्चों को तय दिन के अनुसार निर्धारित मात्रा के अनुसार सप्ताह में दी जाएगी।
पहले दूध सप्ताह में सभी वर्किंग डे यानी 6 दिन दोपहर के भोजन के साथ दूध दिया जाता था लेकिन अब दूध को हफ्ते में तीन दिन दिया जाएगा। इसमें कोई दिन निर्धारित नहीं। दूध मिलने से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य में बेहतर सुधार होगा। बता दें कि सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत पहली से 8वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को निशुल्क पढ़ाने के साथ-साथ उन्हें स्कूल में ही मिड-डे मील के तहत दोपहर का भोजन दिया जाता है।
नई रेसिपी की सारणी की प्रतिलिपि मिल चुकी है। आहार तय कर दिया गया है। किसी भी आहार का दोहराव नहीं होगा। अब दोपहर के भोजन में बच्चों को मिस्सी रोटी, काले चने, हलवा, बेसन का पराठा, गुलगुले के अलावा पुलाव लेकिन हफ्ते में तीन दिन दूध मिलेगा।
-सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।