संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। राजकीय प्राथमिक पाठशाला और बाल वाटिकाओं में पढ़ रहे बच्चों को भाषा, अध्ययन व नैतिकता का विकास करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से निपुण कार्यक्रम शुरू किया गया। कार्यक्रम के तहत प्राथमिक विद्यालयों में आदर्श कक्षा कक्ष, प्रिंट रिच रूम, रीडिंग कॉर्नर, लो कॉस्ट टीएलएम प्रदर्शनी, पौष्टिक भोजन स्टाल, निपुण विद्यार्थी व निपुण अध्यापक इत्यादि गतिविधियां करवाए जाएंगी।
इन गतिविधियों से बच्चों में विभिन्न गतिविधियों से सीखने की प्रवृति का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए प्राथमिक पाठशालाओं में निपुण कार्यक्रम व गतिविधियां करवाई जाएंगी। यह गतिविधियां पाठशाला, कलस्टर और खंड सभी स्तर होंगी। इस पूरे कार्यक्रम की जिलास्तर पर निगरानी की जाएगी।
इसके साथ ही बच्चों की सीखने की गति, उनका बौद्धिक स्तर और शब्दों पर पकड़ की क्षमता की समीक्षा की जाएगी, ताकि इसके आधार पर इस कार्यक्रम में आवश्यक बदलाव कर यह और भी बेहतर बनाया जाए सके। इसका उद्देश्य बच्चों की भाषा, वाक कौशल, शब्दकोष, संवाद इत्यादि गुणों का विकास कर उन्हें मुखर बनाना है।
इससे बच्चों को निजी अनुभव होगा और वे तेजी से सीख सकेंगे। इन गतिविधियों से बच्चों में सीखने की प्रवृति का विस्तार किया जाएगा। चूंकि बच्चे मौखिक की अपेक्षा क्रियाओं से ज्यादा सीखते हैं। बड़ों की क्रियाएं देखकर बच्चे उन्हें दोहराते हैं और स्वयं करने का प्रयास करते हैं।
इससे बच्चों का विकास तेजी से होता है। यही कारण है कि शिक्षा विभाग की ओर से पाठशालाओं में यह कार्यक्रम करवा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत खेल-खेल में, नृत्य, बाल गीत इत्यादि गतिविधियां शामिल हैं। बता दें कि जिले के सभी कलस्टर में यह कार्यक्रम करवाए जाएंगे। जिले में कुल 74 कलस्टर हैं, जिनमें 592 प्राथमिक पाठशाला हैं।
प्राथमिक पाठशाला व बाल वाटिकाओं में करीब 36,000 बच्चे पढ़ रहे हैं। कार्यक्रम जिला एफएलएन समन्वयक संजीव सैनी के नेतृत्व में चलाया जाएगा। इसकी समीक्षा के खंड व जिलास्तर पर टीमों का भी गठन किया गया है। टीम पाठशालाओं में पहुंचकर कार्यक्रम के तहत बच्चों को करवाई जाने वाली गतिविधियों की जानकारी लेगी। इसके साथ ही बच्चों की बौद्धिक क्षमता जाने के लिए बच्चों से संवाद किया जाएगा।
निपुण मिशन के तहत प्राथमिक पाठशालाओं में कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके तहत बाल वाटिका-3 से पांचवीं के बच्चों को दक्ष बनाया जाएगा। पाठशालाओं में गतिविधियों से बच्चों को शब्दकोष, बौद्धिक व संवाद कौशल का विकास किया जाएगा। -संजीव सैनी, जिला समन्वयक एफएलएन।