जिले एक एक युवा इंजीनियर मेक इन इंडिया के नारे को चरितार्थ करने में जुटा है। वह देश का सबसे कम वजन का माइक्रो सेेटेलाइट बनाने जा रहा है। इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड टेक्नालाजी में कार्यरत इंजीनियर सौरभ कौशल अपने संस्थान के सहयोग इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। यह माइक्रो सेेटेलाइट वजन में करीब दो किलो का होगा, जोकि देश में अब तक बनाए जा चुके सेटेलाइट में सबसे कम वजन का होगा।
यह सेटेलाइट इमेज और ट्रैकिंग में काम आएगा। यह सेटेलाइट अंतरिक्ष में एक हजार किलोमीटर की दूरी से पृथ्वी पर दस सेंटीमीटर तक की फोटो ले सकता है। इंजीनियर सौरभ कौशल ने बताया कि माइक्रो सेटेलाइट प्रोजेक्ट पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होंगे।
उन्होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से ग्रांट के लिए अप्लाई किया है। इस प्रोजेक्ट में उनके साथ जार्जिया यूनिवर्सिटी से एरोस्पेस में मास्टर डिग्री कर चुके आनंद, आईआईटी मुंबई से आदित्य गुप्ते, यूआईईटी कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से इंजीनियर अंकित और एनआईटी जालंधर से केमिकल इंजीनियर राघव शर्मा जुड़े हैं।
विदेशी कंपनियों की पेशकश ठुकराई
इंजीनियर सौरभ कौशल ने पिछले दिनों फेलोशिप के तहत 15 दिनों के लिए अमेरिका गए थे। वह वहां नासा एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. टॉय से मिलें और अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताया। डॉ. टॉय उनके प्रोजेक्ट से काफी प्रभावित हुए। इसके बाद सौरभ ने एक कार्यक्रम में सैकड़ों इंडो-अमेरिकन बिजनेसमैन से मुलाकात कर अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताया। सौरभ ने बताया कि कई कंपनियों ने उनके प्रोजेक्ट को आर्थिक मदद देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। सौरभ का कहना है कि वह चाहते हैं कि उनका सेटेलाइट पूरी तरह से स्वदेशी हो, इसलिए विदेशी कंपनियों से करार नहीं किया।
सौरभ बताते हैं कि माइक्रो सेटेलाइट पूरी तरह से स्वदेशी होगा। इसमें सभी पार्ट्स देश में ही बनाए जाएंगे। सौरभ ने बताया कि इससे पहले आईआईटी कानपुर भी हलका सेटेलाइट बना चुकी है, लेकिन उसका वजन करीब 10 किलो है। माइक्रो सेटेलाइट बनाने के लिए इसे अंतरिक्ष में लांच करने के लिए इसरो की मदद ली जाएगी। सौरभ ने बताया कि इसके लिए इसरो से एमओयू साइन किया जाएगा। सौरभ ने बताया कि उनका माइक्रो सेटेलाइट रिचर्स और कामर्शियल सेक्टर में मील का पत्थर साबित हो सकता है। ट्रैकिंग के लिए इसका कामर्शियल सेक्टर में इस्तेमाल किया जा सकता है।