जठलाना। उन दिनों अंग्रेजी हुकूमत का राज हुआ करता था। तब मैं भी काफी छोटी थी। अंग्रेज जब घोड़े पर सैनिकों के साथ निकलते थे तब महिलाएं व लड़कियां उन्हें देखकर घबरा जाती और घरों में छिप जाती थी। कई बार अंग्रेज सुंदर महिला को उठाकर अपने साथ ले जाते थे और काफी अत्याचार करते थे और जब पुरुष इसका विरोध करते थे तब उन्हें कोड़ों से पीटा जाता था। वे तब तक पीटते रहते जब तक व्यक्ति के शरीर से खून न बहने लगे। अंग्रेजी हुकूमत के जुल्मों की यह दर्दनाक कहानी जठलाना के गांव पालेवाला की लगभग 100 वर्षीय बुजुर्ग शांति देवी की जुबानी है। जिसे सुनकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। शांति देवी ने अंग्रेजी हुकूमत के दौरान की यह संघर्ष की कहानी अमर उजाला को बताई। जिसके अंश कुछ इस प्रकार हैं।
शादी और अन्य पर्व पर समारोह करने की नहीं थी इजाजत
भले ही अब बुजुर्ग शांति देवी लगभग 100 साल की हो चुकी हैं लेकिन उस दौरान अंग्रेजों ने भारतीयों पर क्या-क्या जुल्म किए उन्हें अपनी आंखों से देखा सब कुछ अभी भी याद है। शांति देवी ने रुंधे गले से बताया कि अंग्रेज कई बार तो महिलाओं को घर से खींचकर बाल पकड़कर उनसे मारपीट करते थे। यहां तक शादी या अन्य पर्व पर समारोह करने की इजाजत नहीं थी। आजादी से पूर्व हिंदू और मुस्लिमों में काफी भाईचारा होता था। जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ उस समय अंग्रेजों ने पता नहीं क्या चाल चली की इकट्ठा रहने वाले हिंदू मुस्लिम परिवारों के बीच जमकर खूनी संघर्ष हुआ। उनके घर के आगे एक कुआं होता था, उसमें लाशें ही लाशें नजर आई थी जिसे याद करने पर आज भी वह सहम उठती हैं। उन्होंने बताया कि शादी के एक साल बाद ही उनके पति फूल सिंह की मृत्यु हो गई थी। उसके बाद उसके देवर बदन सिंह ने पूरे परिवार का पालन-पोषण किया।
दादी बचपन से सुनाती आ रही उस दौरान की कहानियां
वहीं बुजुर्ग शांति देवी के पौत्र कामेश राणा ने बताया कि उसकी दादी बचपन से ही उन्हें आजादी से पूर्व की बातें बताती आ रही हैं। आज भी देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले शहीदों के प्रति सम्मान देने के लिए उन्हें प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा उसकी दादी को तिरंगा भेंटकर सम्मान किए जाने से उन्हें काफी अच्छा लगा।