संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा स्थानक मॉडल टाउन में चातुर्मास के दिन जितेंद्र मुनि महाराज के सानिध्य में रचित मुनि महाराज ने उत्तम सत्य धर्म को और आगे बढ़ाते हुए कहा कि सत्य साधना से जागृत होता है और साधनों से मृत्यु हो जाता है। एक बार एक शिकारी ने मुनि के सत्य वचन की परीक्षा लेनी चाहिए।
मुट्ठी में एक चिड़िया को दबोचे शिकारी ने मुनिवर से प्रश्न किया कि ये बताओ कि मेरे हाथ में चिड़िया जीवित है या मृत ? मुनि को शिकारी का इरादा पता चल गया। उन्होंने भांप लिया कि यदि वे जीवित कह देंगे तो मुनि का वचन झूठा साबित करने के लिए ये उसे मार देगा। यदि मृत कह देंगे तो ये चिड़िया को उड़ा देगा। जिससे मुनि का वचन मिथ्या साबित हो जाएगा।
मुनि ने कहा इसकी जिंदगी तो तुम्हारे हाथ में है। इसके प्राण तुम्हारे निर्णय पर निर्भर है। तुम चाहो तो इसे जीवन दान दे दो और तुम चाहो तो इसके प्राण छीन लो। शिकारी मुनिवर के भावों को समझ गया और उसके बाद उस चिड़िया को जीवन दान देते हुए मुक्त गगन में उड़ा दिया। कभी-कभी एक झूठ भी किसी को जीवन दान दे जाता है और हमारे झूठ से किसी को मिला जीवन दान सौ सत्य से बढ़कर है।
ऐसा सत्य मत बोलना जिसको बोलने से किसी जीव का घात होता हो, वैसा सत्य बोलना जिस किसी जीव की जान बच जाए। पाप करने का सबसे अच्छा समय कौन सा है? कहा कि पाप करने का सबसे अच्छा समय वो है जब किसी जीव की जान बचाती हो। तो वहां पर झूठ बोलने में कोई गुनाह पाप नहीं है। सीमा पर खड़े हुए सैनिक सैकड़ों लोगों को मार देते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें पाप नहीं लगता।
क्योंकि उनका ध्येय किसी को मारना नहीं है बल्कि अपने देशवासियों को बचाने का है। तो जहां तक संभव हो मौन से, सत्य धर्म की रक्षा करने का प्रयास करें। शत्रु मित्र के रूप में परिवर्तित हो जाया करते हैं तो सत्य की साधना आत्मा की साधना है। सत्य ही भगवान है। सत्यम शिवम सुंदरम ये कहकर सत्य की शोभा बढ़ाई गई है।