संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। मानसून सीजन में पहली बार सोम व पथराला नदियां उफान पर आ गईं। ऐसे में साथ लगते खेतों में दोनों नदियों का पानी घुस गया, जिससे फसलें पूरी तरह से डूब गई। अचानक एक साथ इतना पानी आ जाने से करीब 100 एकड़ से भी ज्यादा में लगी फसल को नुकसान होने के आसार हैं।
पिछले साल भी दोनों नदियों में एक साथ पानी आ गया था, जिससे कई एकड़ में लगी धान की फसल खराब हो गई थी। उधर किसानों का आरोप है कि अगर समय रहते सिंचाई विभाग ने बाढ़ राहत बचाव कार्य पूरे किए होते तो शायद यह नुकसान न होता। बाढ़ के पानी से हुए नुकसान के मुआवजे को लेकर किसानों ने स्पेशल गिरदावरी की मांग की है।
जिले के साथ लगती शिवालिक की पहाड़ियों व मैदानी इलाकों में हुई भारी बाशि के कारण सोम व पथराला नदियों में बाढ़ के हालात बने हैं। कई जगह बाढ़ का पानी नदियों से बाहर निकलकर खेतों में घुस गया है। जिससे क्षेत्र की धान व गन्ने की फसल जलगम्न हो गई है। गांवों के खेतों में काफी एकड़ तक पानी ही पानी नजर आ रहा है।
फसलों में घुसे बाढ़ के पानी के बारे में किसानों ने बताया कि सिंचाई विभाग ने समय रहते बाढ़ बचाव राहत कार्य कराए होते तो नौबत यहां तक नहीं आती। उन्होंने बताया कि इस बार बारिश कम है। अगर हर वर्ष की तरह बारिश होती तो बाढ़ का पानी ज्यादा नुकसान करता है।
किसान विक्रम, संदीप, काका,अजमेर व सुरेंद्र ने बताया कि सिंचाई विभाग हर वर्ष बाढ़ राहत बचाओ कार्य पर करोड़ों रुपए खर्च करता है। उसके बावजूद भी बारिश का पानी हर साल किसानों की फसलें बर्बाद करके चला जाता है। इस बार भी जिले में करोड़ों रुपए के बाढ़ राहत बचाव कार्य या पूरे नहीं हुए या फिर शुरू ही नहीं हुए। समय पर बाढ़ राहत बचाव कार्य पूरे ना होने का खामियाजा आम जनता व किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि अगर सिंचाई विभाग बाढ़ राहत कार्यों को गंभीरता से कराए तो समय से पहले कार्य पूरे हो जाते हैं। बरसात सीजन का यह पहला बाढ़ का पानी है। पहला ही पानी नदियों से निकलकर लोगों के खेतों फसलों को बर्बाद कर रहा है। क्षेत्र के किसानों ने बाढ़ से प्रभावित जमीनों की स्पेशल गिरदावरी कर मुआवजे की मांग की है।
वर्जन
हमने बाढ़ राहत कार्य को पूरी मजबूती के साथ किया है। सभी साइटों पर समय से काम निपटा लिया गया। नदियों के पानी से कहां-कहां नुकसान हुआ है, उसका जायजा लिया जाएगा। - आरएस मित्तल, एसई, सिंचाई विभाग यमुनानगर।