हरियाणा के यमुनानगर के घाड़ क्षेत्र की पंचायत कल्याणपुर में शामिल तीन जुड़वा गांवों कल्याणपुर, अंटारी और बना बहादुरपुर की आबादी महज 1396 है, लेकिन इस पंचायत के ग्रामीणों में देशभक्ति का जज्बा कूट-कूटकर भरा है। तभी तो इस गांव के लगभग 400 लोग विभिन्न सैन्यबलों में सेवाएं दे चुके हैं, जबकि 98 अभी तैनात हैं।
यही नहीं हर घर में फौजी वाली इस पंचायत के तीन युवा देश की रक्षा करते हुए शहीद हो चुके हैं। यह स्थिति तब है जबकि पंचायत में न तो कोई खेल मैदान है और न ही कोई जिम, जिसके कारण युवकों को नदी और खेतों में ही तैयारी करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
हाजी लालदीन की तीन पीढ़ियां फौज में
पंचायत के कई परिवार तो ऐसे भी हैं जिनके एक से अधिक सदस्य सैन्यबलों में तैनात हैं। इनमें से ही एक परिवार दिवंगत हाजी लाल दीन का है। हाजी लाल दीन आजादी के बाद कल्याणपुर से सेना में सबसे पहले भर्ती हुए थे। उनके बेटे रिटायर्ड सूबेदार इकबाल मोहम्मद ने बताया कि उनका बेटा जावीर खान व भाई रजाक मोहम्मद फिलहाल देश की सेवा में कार्यरत हैं। सूबेदार इकबाल मोहम्मद को गर्व है कि उनके पिता हाजी लाल दीन द्वारा भारतीय सेना में भर्ती होने के माध्यम से देशभक्ति का जो पौधा रोपा वह आज गांव में वट वृक्ष बन चुका है।
इसी तरह नूर हुसैन और उनका बेटा दिलशाद भी सैन्यबल से रिटायर हो चुका है। सलामू दीन के तीन में से दो बेटे यासीन और यामीन के अलावा भाई जंगशेर भी सैन्यबल में तैनात हैं, जबकि एक भाई साधु दीन रिटायर हो चुका है। पूर्व सरपंच फकरुद्दीन का एक बेटा सुलेमान फिलहाल सैन्यबल में है, जबकि दूसरा बेटा यासीन रिटायर हो चुका है।
पंचायत के तीन लालों ने शहादत पाई
ताहीर हुसैन ने बताया कि उनकी पंचायत के तीन सैनिकों ने देश के लिए शहादत दी है। दीन मोहम्मद पुत्र मोल दीन 1987 में सेना की तरफ से श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों का मुकाबला करते हुए शहीद हुए थे। सीआरपीएफ का जवान जैमल खान 31 मार्च 2021 को नक्सल प्रभावित असम में हुई गोलीबारी में शहीद हो गया था। वहीं सीआरपीएफ में हवलदार के पद पर कार्यरत गांव कल्याणपुर का 42 वर्षीय नूर हुसैन सितंबर 2022 मेें छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से शहीद हुआ।
भर्ती की तैयारी के लिए युवाओं को सुविधाओं की कमी
सरपंच प्रतिनिधि और पूर्व सैनिक जुल्फान ने बताया कि अपने गांव के वीर सैनिकों के शौर्य को देखते-देखते आज के युवाओं में भी देश सेवा करने का जज्बा भरा हुआ है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में युवक दिन रात अभ्यास करके सेना में भर्ती होने की तैयारियां करते हैं। गांव में खेल का मैदान या जिम न होने से युवाओं को दिक्कत होती है। पंचायत की ओर से इसके लिए प्रयास किया जाएगा। सरकार से भी मांग है कि गांव में विकास कार्यों पर ध्यान दे। खास तौर से यहां स्वास्थ्य सुविधाओं के अलावा पोस्ट आफिस की आवश्यकता है।