साढौरा। रतौली गांव में शुक्रवार को मिट्टी की ढांग गिरने से हुए हादसे में दो महिलाओं की मौत व छह के घायल होने के बाद से आज गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। सुनाई दे रही है तो सिर्फ घरों के अंदर से अपनों को खोने के गम में सुबकती हुई महिलाओं की आवाज। इस हादसे ने लोगों की ईद की खुशी भी छीन ली हैंं।
नसरीना और सतारा के शवों को शुक्रवार देर शाम दफना दिया गया। हादसे में घायल हुए परिजनों की खैरियत जानने के लिए अधिकतर ग्रामीण अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। घरों में केवल महिलाएं ही होने से गलियों में सन्नाटा पसरा है। सरपंच यासीन अली ने बताया कि घायल परवेज व अफसाना की हालत गंभीर है। परवेज का चंडीगढ़ के मेडिकल कॉलेज व अफसाना का पीजीआई में उपचार चल रहा है। मंजूर खान, सलमा, मुस्कान व सूफी का ट्रामा सेंटर में उपचार किया जा रहा है। मुस्कान की हालत गंभीर होने के कारण शायद उसे भी पीजीआई रेफर किया जाएगा।
जिस ढांग की मिट्टी ढहने के कारण शुक्रवार को हादसा हुआ वहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार कई साल पहले यहां से मिट्टी निकाल रही दो महिलाओं पर भी इसी तरह मिट्टी गिरी थी। इनमें से एक को तो सकुशल बचा लिया गया। रुखसाना की रीढ़ में आई चोट के कारण वह अभी तक चारपाई पर ही लेटी रहती है।
इन्हीं की तरह कुछ साल पहले नाजीम यहां से मिट्टी निकालकर अपनी बुग्गी पर लाद रहा था कि उसके ऊपर भी मिट्टी गिर गई। उसे भी बचा लिया गया था। 20 मई 2020 को मनरेगा के तहत मिट्टी की ढांग खोदकर ट्रालियों में लादने के दौरान भी ढांग ढहने से दो मजदूर सलीम व इमरान मिट्टी के नीचे दबकर घायल हो गए थे।
मीरदीन, राजू व शराफत ने बताया कि पंचायती जमीन पर मौजूद यह ढांग कई साल पहले लगभग डेढ़ एकड़ में फैली थी। यहां से निरंतर मिट्टी की खुदाई जारी रहने के कारण इसका दायरा बहुत कम रह गया है। ग्रामीण अब इस मनहूस साबित हो चुके टिब्बे को खत्म करने की सोचने लगे हैं। संवाद