संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रादौर के सीनियर मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) डॉ. विजय परमार को स्वास्थ्य विभाग ने निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें अंबाला सिविल सर्जन कार्यालय में संबद्ध किया गया है। यह कार्रवाई रादौर ब्लॉक में लगातार गिरते लिंगानुपात पर की गई है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार रादौर ब्लॉक में 1000 लड़कों के मुकाबले केवल 766 लड़कियां दर्ज की गई हैं, जो प्रदेश में सबसे निचले स्तर पर है। विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। पिछले कई दिनों से मुख्यालय स्तर पर प्रदेश के सभी जिलों के लिंगानुपात की समीक्षा की जा रही थी।
बैठकों में यह देखा गया कि किन जिलों और ब्लॉकों में लिंगानुपात लगातार गिर रहा है और इसके पीछे क्या कारण हैं। समीक्षा में रादौर की स्थिति सबसे चिंताजनक पाई गई, जिसके बाद विभाग ने यह सख्त कार्रवाई की। जिले में केवल रादौर ही नहीं, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छछरौली का रिकॉर्ड भी बेहद खराब श्रेणी में शामिल है।
छछरौली में 1000 लड़कों के मुकाबले 799 लड़कियां दर्ज की गई हैं। हालांकि वर्ष 2025-26 में जिले का औसत लिंगानुपात 928 रहा है। समीक्षा में सिविल सर्जन को भी अधिकारियों के समक्ष जवाब देना पड़ा था। इसके बाद रादौर और छछरौली के एसएमओ को नोटिस जारी हुआ था।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अपने-अपने क्षेत्रों में सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना और लिंगानुपात सुधारना संबंधित एसएमओ की जिम्मेदारी होती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो रादौर में 766, छछरौली में 799, व्यासपुर में 916, प्रतापनगर में 1022, नाहरपुर में 954, सरस्वतीनगर में 1074, साढौरा में 972 और शहरी क्षेत्र में 934 का लिंगानुपात दर्ज किया गया है।
जिले 150 गांवों में कम लिंगानुपात
जिले के करीब 150 गांव ऐसे हैं जहां लिंगानुपात अन्य के मुकाबले काफी कम है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन गांवों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत रैलियां, नुक्कड़ नाटक और प्रचार सामग्री के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा।
कृषि मंत्री के क्षेत्र से जुड़ा मामला
रादौर ब्लॉक कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा की विधानसभा क्षेत्र में आता है। ऐसे में खराब लिंगानुपात को लेकर हुई यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि लगातार गिरते आंकड़ों से सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की छवि पर भी असर पड़ा है।