यमुनानगर। जिले में मरीजों को आपातकाल में जल्द स्वास्थ्य सुविधाएं पुरानी एंबुलेंस गाड़ियों के सहारे दी जा रही हैं। आधे से ज्यादा गाड़ियां निर्धारित किलोमीटर से दुगना चल चुकी हैं, उसके बाद भी इन्हीं गाड़ियों को सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के पास चार नई गाड़ियां आ चुकी हैं लेकिन अब तक उन्हें ऑन रोड नहीं किया गया। बीते छह महीनों में दो बार गाड़ियां बीच रास्ते में खराब हो चुकी हैं।
सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग को करीब डेढ़ महीने पहले सरकार की ओर से तीन नई गाड़ियां (इको) दी गई थी। विभाग ने इन गाड़ियों का अब तक रजिस्ट्रेशन भी नहीं करवाया है।
विभाग तय नहीं कर पाया गाड़ी कहां लगाए:
करीब आठ महीने पहले चार एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग को मिली थी, जिनमें से तीन गाड़ियां को सीएचसी रादौर और छछरौली में भेज दिया गया। एक गाड़ी को लेकर विभाग अब तक तय नहीं कर पाया कि इसे कहां चला जाए।
सिविल अस्पताल यमुनानगर के वरिष्ठ अधिकारी उसे सिविल अस्पताल यमुनानगर के लिए लगाना चाहते थे। तबादला होने के कारण गाड़ी अब भी ट्रामा सेंटर में खड़ी है। इस गाड़ी के साथ आई तीन अन्य गाड़ियां करीब 50 हजार किलोमीटर चल चुकी हैं।
ये हैं एंबुलेंस की स्थिति:
जिले में एंबुलेंस के तौर पर कुल 19 गाड़ियां हैं, जिनमें पांच गाड़ियां ट्रॉमा सेंटर और एक गाड़ी सिविल अस्पताल जगाधरी में हैं। बिलासपुर और छछरौली पीएचसी के पास 2-2, रादौर और साढौरा सीएचसी के पास 2-2, कलानौर पीएचसी के पास एक, खिजराबाद, मुस्तफाबाद, नाहरपुर और खारवन सीएचसी में एक-एक गाड़ी है। इन 19 में से करीब सात से आठ गाड़ियां अक्सर खराब ही रहती हैं।
कंडम की श्रेणी में आ चुकी हैं आधे से ज्यादा गाड़ियां
स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस सर्विस में लगी आधे से ज्यादा गाड़ियां कंडम की श्रेणी में आ चुकी हैं। रादौर सीएचसी में दो और नाहरपुर सीएचसी में करीब आठ महीने पहले आई थी, बाकी 16 गाड़ियां नवंबर 2009 की चल रही हैं। सरकारी नियम के मुताबिक 1.80 किलोमीटर तय करने के बाद गाड़ी कंडम की श्रेणी में आ जाती है। लेकिन अधिकतर गाड़ियां चार लाख किलोमीटर से भी अधिक की दूरी तय कर चुकी हैं। नियमों को ताक पर रख कर गाड़ियां का चलाया जा रहा है।
पीएचसी-सीएचसी से बुलाना पड़ता है आपातकाल में:
जिले में एंबुलेंस सुविधा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से टोल फ्री 102 नंबर है। जिसका कंट्रोल रूम ट्रामा सेंटर में ही बनाया गया है। लेकिन कंट्रोल रूम में करीब 6-7 गाड़ियां ही होती है। जिनमें से 1-2 खराब रहती है। एक से दो गाड़ियां किलकारी योजना (गर्भवती महिला को लाने और ले जाने में) में लगी रहती है। ऐसे में आपातकाल में पीएचसी या सीएचसी से गाड़ियों को बुलाया जाता है।
एक सप्ताह में ऑन रोड हो जाएगी चारों गाड़ियां: डा. रमेश
सीएमओ डा. रमेश कुमार का कहना है कि चारों गाड़ियों को एक सप्ताह में ऑन रोड कर दिया जाएगा। तीन गाड़ियां अभी आई हैं, उनके कागज बनवाने में समय लग रहा है। एक गाड़ी सिविल अस्पताल के लिए रखी थी, जिसे भी अगले सप्ताह तक ऑन रोड कर दिया जाएगा।