संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। 112 करोड़ रुपये की लागत से लौहगढ़ के नाम से भगवानपुर गांव बनाए जाने वाले बाबा बंदा सिंह बहादुर स्मारक व संग्रहालय भव्य होगा। स्मारक के भीतर सेट और डायोरमा डिजाइन तैयार किया जाएगा जाे पर्यटकों को विशिष्ट ऐतिहासिक काल या महत्वपूर्ण घटनाओं की याद दिलाएगा। इतना ही नहीं इसमें तैयार होने वाली स्क्रिप्ट के लिए कच्ची सामग्री (वीडियो, ऑडियो, चित्र) और शोध पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।
वहीं स्क्रिप्ट का वीडियो निर्माण, प्रिंट ग्राफिक्स और ऑडियो गाइड के लिए हिंदी, अंग्रेजी और गुरुमुखी भाषाओं में अनुवाद भी किया जाएगा। इसके अलावा संग्रहालय में सभी स्थिर ग्राफिक्स की प्रिंट फाइलें भी रखी जाएंगी। इतना ही नहीं स्क्रिप्ट पर आधारित सभी वीडियो के लिए स्टोरी बोर्ड में आवश्यक दृश्यों के माध्यम से वीडियो के उपचार का विवरण भी दिया जाएगा। आवश्यकतानुसार, वीडियो का वॉयस ओवर करने के लिए तीन प्रतिष्ठित वॉयस ओवर कलाकार (हिंदी, अंग्रेजी और गुरुमुखी) में नियुक्त भी किए जाएंगे। इससे संग्रहालय में आने वाली संगत को समझने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
पुराने लौहगढ़ की अंतिम प्राचीर 1900 फीट ऊंची
बता दें लौहगढ़ का पुराना किला आधा हिमाचल और आधा हरियाणा में स्थित है। जो 7000 हजार एकड़ में फैला हुआ था। वर्तमान यमुनानगर के भगवानपुर गांव से हिमाचल की पहाड़ी पर किले की पुरानी दीवार भी बनी हुई है। यहां तक पहाड़ी की तलहटी में पुराना लौहगढ़ के नाम से गुरुद्वारा साहिब भी बना हुआ है। आज भी संगत वहां माथा टेकने के लिए पहुंचती है। बता दें पुराने लौहगढ़ किले की पहली किलेबंदी की रूपरेखा समुद्र तल से 1200 फीट की ऊंचाई से शुरू होती है और किले की अंतिम प्राचीर 1900 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। ऐसा अनोखा किला दुनिया की सबसे शक्तिशाली मुगल सेना से निपटने के लिए बनाया गया था। मुगलों के पास उस समय के सबसे अत्याधुनिक हथियारों से लैस एक विशाल सेना थी। युद्ध की रणनीति के रूप में, मुगल सेना दुश्मन के किले की घेराबंदी करती थी जिससे जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक सामग्री की आपूर्ति बाधित हो जाती थी।
बाबा बंदा सिंह बहादुर स्मारक व संग्रहालय भव्य होगा। स्मारक के भीतर सेट व डायोरमा डिजाइन तैयार किया जाएगा। जो पर्यटकों को विशिष्ट ऐतिहासिक काल या महत्वपूर्ण घटनाओं की याद दिलाएगा। इतना ही नहीं इसमें तैयार होने वाली स्क्रिप्ट के लिए कच्ची सामग्री और शोध पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।
-अमित, एक्सईएन, सिंचाई विभाग नारायणगढ़