यमुनानगर। दैनिक जीवन की समस्याओं को समझकर उनके व्यावहारिक समाधान तलाशना नवाचार और सफल कारोबार की दिशा में पहला कदम है। विभिन्न ऑनलाइन नवउद्यम इसी सोच के उदाहरण हैं। यह बात आईआईटी मंडी की पूर्व छात्रा एवं एसएसीसी की परियोजना प्रबंधक मनीषा अग्रवाल ने डीएवी गर्ल्स कॉलेज में कार्यशाला के दौरान कही।
उन्होंने छात्राओं को समस्याओं के विश्लेषण, नए विचार विकसित करने और उन्हें व्यावहारिक रूप देने के तरीके बताए। प्राचार्या डॉ. सुरिंदर कौर के नेतृत्व में लगी कार्यशाला में इनोवेशन एंबेसडर जस्मीत कौर ने समस्याओं के मूल कारण पहचानने की तकनीकें समझाईं। वैशाली वर्मा ने नवाचारी विचार विकसित करने की विधियों की जानकारी दी।
प्राचार्या डॉ. कौर ने कहा कि ऐसी गतिविधियां छात्राओं की रचनात्मकता और समस्या समाधान क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं। इस दौरान कॉलेज और एसएसीसी के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इससे छात्राओं को नवउद्यम संबंधी परामर्श और अपने विचारों को परियोजनाओं में बदलने के अवसर मिलेंगे।