यमुनानगर। पिछले साल राइस मिलों में सामने आए करीब 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले के बाद सरकार ने इस बार कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) पॉलिसी को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। इस पर जिले की कुल 184 राइस मिलों में से इस बार केवल 150 मिलरों ने ही सरकार के धान की कुटाई के लिए अनुबंध कराया है। वहीं 34 राइस मिलरों ने सीएमआर पॉलिसी से दूरी बना ली है।
पिछले साल जिले की सात राइस मिलों में करीब 70 करोड़ रुपये का धान घोटाला सामने आया था। इस मामले में मंडियों में धान की फर्जी खरीद और फर्जी गेटपास दिखाकर धान के लेनदेन में गड़बड़ी किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद सरकार ने इस बार सीएमआर पॉलिसी के तहत होने वाले कार्यों पर निगरानी बढ़ा दी है। पंजीकरण से लेकर धान के परिवहन तक कई प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है, ताकि धान की आवाजाही का पूरा रिकॉर्ड रखा जा सके।
अनाज मंडियों से धान उठान के लिए करीब 400 ट्रक लगाए गए हैं। इन सभी ट्रकों को जीपीएस से जोड़ा गया है। इससे मंडी से धान लेकर निकलने के बाद ट्रक कहां जा रहा है और राइस मिल तक कब पहुंच रहा है, इसकी लाइव लोकेशन सरकार के पास रहेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य धान के परिवहन में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकना है।
इसके साथ ही अनाज मंडियों और राइस मिलों की जियो फेंसिंग को भी आपस में कनेक्ट किया गया है। जिस मंडी से ट्रक धान लेकर निकलेगा, राइस मिल में पहुंचने पर उसकी जियो फेंसिंग का मिलान होना जरूरी होगा। यदि मंडी और मिल की जियो फेंसिंग का मिलान नहीं होता है तो ट्रक के निर्धारित मिल तक नहीं पहुंचने की आशंका के आधार पर जांच की जा सकेगी। संवाद
कर्ज में डूबे मिलर करा रहे अनुबंध : मनीष
राइस मिलर एसोसिएशन यमुनानगर के प्रधान मनीष बंसल का कहना है कि सरकार की पॉलिसी राइस मिलरों के हित में नहीं है। ऐसी पॉलिसी से मिलरों को नुकसान ज्यादा हो रहा है। इसी कारण मिलर धीरे-धीरे इस काम से पीछे हटने लगे हैं। जिन मिलरों ने इस बार अनुबंध कराया है, उनमें ज्यादातर ऐसे हैं जिन्होंने बैंकों से कर्ज ले रखा है। यदि वे मिल बंद करते हैं तो उन्हें मिल बेचने तक की नौबत आ सकती है। अगले साल सीएमआर पॉलिसी के तहत काम करने वाले मिलरों की संख्या और कम हो सकती है।
इस बार मंडी से धान उठाने से लेकर राइस मिल तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। जिले में इस बार केवल 150 राइस मिलरों ने ही अनुबंध कराया है। मंडियों में धान की खरीद सुचारु रूप से चल रही है। - नितिश सिंगला, डीएफएससी, यमुनानगर।