संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। श्रावण माह की शिवरात्रि पर हरिद्वार से गंगाजल लाए कांवड़िये आज शिवालयों में जलाभिषेक कर भोलेनाथ का पूजन करेंगे। अंतिम दिन कांवड़ियों के कदम पहले से ज्यादा तेजी से अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहे। हालांकि दूर-दराज के कांवड़िये निकल चुके हैं लेकिन अभी आसपास के कांवड़ियों की यात्रा जारी है।
जिले के अधिकतर कांवड़िये पहुंच गए हैं जबकि कुछ सुबह जल लेकर सीधे मंदिरों में पहुंचेंगे। इसके अलावा अंतिम दिन शहर सहित जिले की तमाम सड़कों पर डाक कांवड़ की धूम देखने को मिली। इस दौरान पिकअप, ट्रैक्टर-ट्रॉली, कैंटर और ट्रक इत्यादि पर डाक कांवड़िये जाते दिखाई दिए। इस दौरान भक्तों ने वाहनों को भव्य रूप से सजा रखा था। शिवरात्रि के लिए शहर सहित जिले के सभी मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया है।
रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजे मंदिर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। भक्तों की सुविधा के लिए मंदिरों में प्रबंधक कमेटियों की ओर से विशेष व्यवस्था की गई है। भीड़ नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रबंधक समितियों की ओर से स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी लगाई गई है। इस दौरान सबसे ज्यादा भीड़ जिले के पौराणिक व प्राचीन मंदिरों में होती है। ऐसे में इन मंदिरों में विशेष व्यवस्था की गई है।
श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर कमेटी प्रधान डॉ. जनार्दन शर्मा ने बताया कि शिवरात्रि के लिए मंदिर में रेलिंग लगाई गई है, ताकि भक्तों की भीड़ नियंत्रित की जा सके। जलाभिषेक के साथ मंदिर में संकीर्तन होगा और शाम तक भंडारा चलाया जाएगा। इसी तरह श्रीकालेश्वर महादेव मठ मंदिर के महंत शांतानंद महाराज ने बताया कि शिवरात्रि के लिए मंदिर में विशेष व्यवस्था की गई है जिससे यहां भक्तों को कोई परेशानी न हो।
पंडित ललित ने बताया कि श्रावण शिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक करते समय मुख उत्तर दिशा की ओर रखें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल न चढ़ाएं। चूंकि यह दिशा भगवान शिव का प्रवेश द्वार मानी जाती है। श्रावण शिवरात्रि की पूजा के समय तांबे के लोटे का प्रयोग करें और इसी से जल अर्पित करें। दूध चढ़ाने के लिए स्टील या पीतल के लौटे का प्रयोग करें। शिवलिंग पर जल की धारा बनाकर अर्पित करें। जलाभिषेक के दौरान पंचाक्षरी मंत्र का उच्चारण करते रहें।
पंडित रमन वत्स ने बताया कि महादेव की पूजा के लिए सबसे पहले प्रात: स्नान इत्यादि के बाद भगवान शिव के समक्ष व्रत संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में भगवान शिव का जलाभिषेक कर, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। श्रावणी शिवरात्रि में मां पार्वती और गणेश की पूजा भी अवश्य करें। भगवान शिव को गंगाजल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गन्ने का रस इत्यादि अर्पित करें। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर रोली, पुष्प, सफेद चंदन, बेलपत्र, धतूरा, कपूर और फल अर्पित करें। धूप, दीप, फल व फूल चढ़ाकर महादेव का ध्यान करें। शिव चालीसा, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव पंचाक्षरी मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद महादेव की आरती करें।
कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़िये। संवाद
कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़िये। संवाद
कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़िये। संवाद
कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़िये। संवाद
कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़िये। संवाद