मंगलवार को मथुरा से आए यमुना रक्षक दल के सैकड़ों सदस्यों ने हथनीकुंड बैराज पर यमुना घाट पर पूजा-अर्चना की। बैराज पर बह रहे निर्मल और स्वच्छ जल को बोतलों में भरकर दल के सदस्य अपने साथ ले गए। सुबह करीब 11 बजे यमुना रक्षक दल का जत्था हथनीकुंड बैराज पर पहुंचा।
सभी ने यमुना को नमन कर स्नान और पूजा-अर्चना की और यमुना को आजाद करो के नारे लगाए। ये लोग यहां करीब तीन घंटे तक रुके रहे। यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जयकृष्ण दास ने बताया कि हम सोमवार को मथुरा से चलकर पलवल, फरीदाबाद, पानीपत होते हुए मंगलवार को यहां हथनीकुंड बैराज पर आए हैं।
हमारे यहां आने का मुख्य उद्देश्य यमुना के पानी को हथनी कुंड से पूर्ण रूप से आजाद कराना है, क्योंकि हथनीकुंड बैराज से यमुना में पूरा पानी नहीं छोड़ा जाता। भारत का संविधान भी कहता है कि कोई भी प्रांत किसी नदी के पानी को सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए बांधकर नहीं रख सकता।
उन्होंने कहा कि यमुना का जल सिर्फ हथनी कुंड पर शुद्ध है। मथुरा में तो यमुना के जल के नाम पर दिल्ली की गंदगी सप्लाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि यमुना के शुद्धीकरण के लिए 2011 में यमुना रक्षक दल के एक लाख सदस्यों ने जंतर मंतर पर धरना दिया था और दिल्ली में जल संसाधन मंत्री जयंती पटेल से मिले थे। उन्हाेंने आश्वासन दिया था कि दिल्ली की गंदगी के लिए 22 किलोमीटर लंबा नाला बनाया जाएगा।
मंत्री के आश्वासन के बाद कुछ भी नहीं हुआ। मथुरावासियों के हिस्से में यमुना के शुद्ध जल की बजाय दिल्ली के गटरों का पानी आ रहा है। इसी आंदोलन को लेकर यमुना रक्षक दल के सैकड़ों सदस्य हथनीकुंड आए हैं। इस मौके पर उनके साथ यमुना रक्षक दल के हरियाणा राज्य के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह चौहान, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राकेश यादव, रमेश सिसौदिया, साध्वी गीता, श्रीमती सीता अग्रवाल, अशोक करनाल आदि मौजूद थे।
दिल्ली पहुंचते-पहुंचते विषैला हो जाता है जल
उद्गम स्थल पर तो यमुना नदी का जल शुद्ध है, लेकिन इलाहाबाद पहुंचते-पहुंचते यह नदी गंदे नाले में बदल जाती है। पार्टियां इस मुद्दे को अपने घोषणा पत्र में उठाती है, लेकिन सरकार बनने के बाद यह मुद्दा ठंडे बस्ते में पड़ जाता है। यदि सरकार ने जल्द यमुना की इस अभिशाप से मुक्ति के लिए कदम नहीं उठाए तो यमुना रक्षक दल सत्याग्रह के साथ-साथ आंदोलन शुरू कर देगा। यह शब्द मुथरा से आए यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास ने हथनीकुंड बैराज ने जिमखाना क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहे। संत जयकृष्ण दास ने कहा कि हथनीकुंड बैराज से छोड़ा जाने वाला पानी मथुरा तो दूर दिल्ली तक ही विषैला हो जाता है, जो यमुना के अस्तित्व के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि वह केंद्र और प्रदेश सरकार से अपील करते हैं कि दोनों मिलकर इसके लिए कार्य करें। यमुना में मिलने वाले सभी गंदे नाले बंद किए जाएं और ट्रीटमेंट प्लांटों से छोड़े जाने वाले पानी की भी जांच की जाए।
लोकसभा में जल ले जाकर दिखाएंगे यमुना का प्रदूषण
संत जयकृष्ण दास ने कहा कि यमुना की स्थिति का मुद्दा वह लोकसभा में उठाएंगे। इसके लिए उन्होंने हैथनी कुंड बैराज से यमुना का जल बोतल में लिया है। इसी प्रकार मथुरा की यमुना का जल भी एक बोतल में जमा करेंगे और दोनों स्थानों के जल का अंतर लोकसभा में दिखाएंगे।
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दिल्ली तक समा जाते हैं दो दर्जन नाले
यमुना रक्षक दल के सुरेंद्र कुमार ने बताया कि यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और दिल्ली तक यमुना नदी में मिलते हैं। उक्त नालों का पानी सीधे तौर पर यमुना में मिला जा रहा है, जो दिन-प्रतिदिन नदी को विषैला बना रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि केंद्र और प्रदेश सरकार इससे अनभिज्ञ हो, ये वह नाले हैं जो सरकार की स्वीकृति से बनाए गए हैं।