संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। संत हमेशा इंसान के जीवन को बेहतर बनाते हैं। संत श्रद्धा, भक्ति, त्याग, और सेवा जैसे गुणों से जोड़कर आध्यात्मिक मार्ग पर चलने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह बात डेरा बाबा लालदास कपालमोचन के गद्दीनसीन संत निर्मलदास महाराज ने कपालमोचन डेरा में श्रद्धालुओं से कही।
उन्होंने कहा कि संत लोगों को सांसारिक दुखों से मुक्ति पाने और आत्मज्ञान की दीक्षा देने में मदद करते हैं। संत ने फरमाया कि संतों का मानना है कि श्रद्धा एक महत्वपूर्ण गुण है जो आध्यात्मिक मार्ग पर सफलता की कुंजी है। उनका कहना है कि पूर्ण श्रद्धा के साथ गुरु और ईश्वर में विश्वास रखने से व्यक्ति को कठिनाइयों का सामना करने और सफलता प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।
भक्ति, या भगवान के प्रति प्रेम, संतों द्वारा सिखाया गया एक और महत्वपूर्ण गुण है। निर्मलदास जी ने कहा कि भक्ति के माध्यम से, व्यक्ति भगवान के करीब आ सकता है और उनके आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।संतों ने हमेशा त्याग और निस्वार्थ सेवा के महत्व पर जोर दिया है।
उन्होंने कहा कि संतों का मानना है कि सांसारिक इच्छाओं और मोहों का त्याग करके, व्यक्ति आध्यात्मिक विकास प्राप्त कर सकता है।निस्वार्थ सेवा पर जोर देते हुए संत जी ने फरमाया कि संतों ने हमेशा दूसरों की सेवा करने और जरूरतमंदों की मदद करने की शिक्षा दी है। उनका मानना है कि सेवा के माध्यम से, व्यक्ति अपने अहंकार को कम कर सकता है और आध्यात्मिक रूप से विकसित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि संतों के विचार लोगों को जीवन के अर्थ और उद्देश्य को समझने में मदद करते हैं, और उन्हें एक अधिक सार्थक और संतुष्ट जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं। इस मौके पर डेरे के प्रबंधक अमरनाथ ग़्यासडा, मास्टर रमेशचंद, पूर्व प्रधान महिंद्रपाल नागरा, रामकिशन, रामचन्द्र, ताराचंद, सतीश कुमार यमुनानगर, निर्मल सिंह, रामचन्द्र, जयसिंह, श्यामलाल बटली, इंद्रराज, इंद्रसेन, राजकुमार समेत सभा के गणमान्य सदस्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान प्रवचन करते संत निर्मलदास महाराज। संवाद - फोटो : संवाद