संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। साध्वी सुमान्या भारती ने मानव जीवन में ब्रह्मज्ञान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान सनातन काल से चली आ रही वह दिव्य प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से मनुष्य देवतुल्य बन सकता है। ब्रह्मज्ञान द्वारा आत्मा को उसकी वास्तविक पहचान और जीवन के परम लक्ष्य की प्राप्ति होती है।
मानव शरीर की प्राप्ति स्वयं परमात्मा की असीम कृपा का प्रतीक है, किंतु आज के युग में मनुष्य केवल इच्छाओं की पूर्ति, परिवार के पालन-पोषण और सांसारिक कर्तव्यों तक ही अपने जीवन को सीमित कर लेता है। उन्होंने बताया कि मानव जीवन का उद्देश्य इससे कहीं अधिक व्यापक है।ब्रह्मज्ञान का संबंध किसी विशेष धर्म, संप्रदाय या जाति से नहीं है। इसका आधार आत्म साक्षात्कार और मानव मन-मस्तिष्क का पूर्ण विकास है। मनुष्य को जन्म के बाद जैसा वातावरण और समाज मिलता है, उसका व्यक्तित्व और आचरण उसी के अनुरूप ढल जाता है। यदि सकारात्मक वातावरण और विचार मिलें, तो जीवन में बड़ा परिवर्तन संभव है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान की दिव्य कार्यशैली ब्रह्मांड की सकारात्मक तरंगों के माध्यम से मानव जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। ब्रह्मनिष्ठ संत के सान्निध्य में रहकर ध्यान साधना ने अंतःकरण में प्रकाश का अनुभव होता है।
दिव्य ज्योति आश्रम में सत्संग सुनती संगत। स्वयं