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भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे आरटीए डॉ. सुभाष को जेल

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यमुनानगर। ट्रांसपोर्टरों से मंथली वसूली के मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे आरटीए डॉ. सुभाष चंद्र का चार दिन का रिमांड पूरा होने के बाद बुधवार को दोबारा से कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है जबकि अन्य चार दलाल आरोपी अंकित, लवली, नीरज व संदीप को पहले ही जेल भेजा चुका है। वहीं रिमांड के दौरान विजिलेंस टीम को आरटीए से कुछ नहीं मिला।
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उल्लेखनीय है कि करनाल विजिलेंस को यूपी के शामली निवासी ट्रांसपोर्टर अख्तर ने आरटीए डॉ. सुभाष चंद्र के नाम से ओवरलोड वाहन निकालने के लिए मंथली लेने की शिकायत दी थी। इसके बाद दलालों को पकड़ने के लिए विजिलेंस ने जाल बिछाया। नौ अक्तूबर को शिकायतकर्ता से 40 हजार रुपये लेते पंसारी बाजार निवासी अंकित व उसके साथी लवली को पकड़ा। इसके बाद बाईपास रोड से गांधीधाम कॉलोनी निवासी नीरज को काबू किया। आरोपियों के घर से करीब पांच लाख रुपये भी विजिलेंस ने बरामद किए थे। बाद विजिलेंस ने संदीप को गिरफ्तार किया था। उसके घर से दस लाख रुपये बरामद हुए थे। इन दलालों से कुल 36 लाख 15 हजार रुपये बरामद किए गए थे।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया था कि वे आरटीए के नाम से ओवरलोड वाहनों को निकलवाने के लिए रुपये लेते थे। हर गाड़ी का रेट तय करते थे। हरियाणा नंबर की गाड़ी के 10 हजार व दूसरे राज्य की गाड़ी का 15 हजार रुपये प्रतिमाह फिक्स था। उधर, विजिलेंस के इंस्पेक्टर संदीप के मुताबिक आरोपी आरटीए का रिमांड पूरा होने के बाद जेल भेज दिया गया है। पूछताछ के दौरान कुछ नहीं मिला। मामले में आगे भी जांच जारी है।
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कार्रवाई से बचने के लिए आगे-पीछे चलानी पड़ती थी गाड़ी
सूत्रों के अनुसार आरटीए डॉ. सुभाष चंद्र ज्यादातर रात के समय ही जांच करते थे। नौ बजे ही इनकी कार्रवाई शुरू हो जाती थी जो देर रात तक चलती थी। ऐसे में खनन सामग्री लेकर चल रहे डंपर चालक व उनके मालिक परेशान थे। वहीं कार्रवाई से बचने के लिए ट्रांसपोर्टर पांच किमी के दायरे में लोड गाड़ी के आगे और पीछे एक-एक कार लगा देते थे। इससे आरटीए की लोकेशन पता चलती रहती थी। वहीं आरटीए की लोकेशन भेजने वाला व्यक्ति भी लगभग 10 बजे तक ही लोकेशन दे पाता था। बताया जा रहा है कुछेक ट्रांसपोर्टरों ने आरटीए द्वारा बेवजह परेशान करने पर यह कार्य छोड़ दिया था।
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